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सत्र को नियमित रखना होगी सबसे बड़ी चुनौती

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वाराणसी। कोरोना संक्रमण के कारण स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों के सामने भविष्य का संकट खड़ा है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने भी छात्रों के भविष्य को लेकर चुनौतियां हैं। शासन द्वारा अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा कराने का निर्देश दिया गया है लेकिन अभी तक विश्वविद्यालयों को शासनादेश नहीं जारी किया गया है। परीक्षा कराए जाने से छात्रों में खुशी है तो शिक्षाविदों ने भी इसका स्वागत किया। शिक्षाविदों का कहना है कि परिस्थिति के अनुसार लिया गया यह सराहनीय कदम है।
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छात्रों का नहीं होना चाहिए नुकसान
महामारी को देखते हुए सितंबर में परीक्षा कराए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि उस दौरान जो हालात होंगे उस हिसाब से ही निर्णय लिए जाएंगे। वहीं विश्वविद्यालयों के सामने आगामी सत्र को नियमित रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। 2001 में भी आईटी बूम के दौरान सत्र नियमित करने की चुनौती विश्वविद्यालयों ने झेली हैं। उस दौरान गर्मी की छुट्टियों को समाप्त कर दिया गया था। अब उसी हिसाब से निर्णय लेने होंगे। छात्रों का हित सर्वोपरि है और उनका नुकसान किसी भी तरह से नहीं होना चाहिए। - प्रो. दुर्ग सिंह चौहान, पूर्व कुलपति
भविष्य के साथ ही संपूर्ण जीवन का भी है प्रश्न
कोविड-19 के इस दौर में शिक्षा व्यवस्था पर सबसे विपरीत प्रभाव पड़े हैं। कई प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने परीक्षा कराने पर असहमति जताई है। वहीं प्रदेश सरकार ने अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा कराने का निर्देश दिया है। मेधावी छात्रों में इस घोषणा से खुशी है लेकिन अभिभावक थोड़े चिंतित हैं कोरोना के कारण। हमें यह विश्वास दिलाना होगा कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा के सभी उपाय मौजूद रहेंगे। भविष्य के साथ ही जीवन का भी प्रश्न है। छात्रों की योग्यता का सही आंकलन होना बेहद जरूरी है। - प्रो. राममोहन पाठक, पूर्व कुलपति
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कठिन है लेकिन असंभव नहीं
कोरोना संक्रमण काल में परीक्षाएं कराना कठिन तो है लेकिन असंभव नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग और सुरक्षा मानकों के साथ अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं कराई जा सकती हैं। संकटकाल में हाथ पर हाथ रखकर बैठने से बेहतर है कि आगे बढ़ा जाए। शासन और यूजीसी का यह निर्णय छात्र और शिक्षा के हित में है। चरणबद्ध ढंग से सावधानी बरतते हुए परीक्षाएं कराई जाएं। अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए तो परीक्षा कराना नितांत आवश्यक है। नहीं से बेहतर है कि कुछ सकारात्मक होना चाहिए। - प्रो. प्रेम नारायण सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग
प्रतिभा के आंकलन के लिए परीक्षा जरूरी
छात्रों की प्रतिभा का आंकलन करने के लिए परीक्षा तो नितांत आवश्यक है। विश्वविद्यालय परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। शासन का आदेश मिलते ही सुरक्षा मानकों और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ परीक्षाएं कराई जाएंगी। डिविजन तो पूरी जिंदगी भर के लिए होता है तो ऐसी स्थिति में परीक्षा का विकल्प सबसे बेहतर है। छात्रों को उनकी परफार्मेंस के आधार पर ही अंक मिलेंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए जैसी परिस्थिति होगी वैसा निर्णय लिया जाएगा। - प्रो. अजीत कुमार शुक्ला, डीन, फैकल्टी आफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट स्टडीज
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