अनेई ग्राम सभा में बने पावर हाउस के कर्मचारियों का भवन जर्जर हो गया है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो हादसा हो सकता है। कंट्रोल रूम से लेकर जेई और लाइनमैन के निवास के लिए बने कमरे के प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहे हैं। इसके चलते रात में ड्यूटी करने वाले स्टॉफ को खुले में रात बितानी पड़ती है।
हद तो तब हो जाती है जब बारिश के दौरान लाइन मैन के रूम की छत से पानी टपकने लगता है। पानी से भरे रूम में कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पावर हाउस भवन का निर्माण वर्ष 1965 में कराया गया है। इसमें कंट्रोल रूम के अलावा आधा दर्जन से अधिक कमरे हैं। बेलवा निवासी लाइनमैन बाबुराम का कहना है कि एक भी कमरा ऐसा नहीं है जिसमें रात गुजारी जा सके। बरसात में पानी टपकता है।
मुर्दहा निवासी हीरालाल का कहना है हम लोगों के रहने वाला आवास अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। कमरे में बना शौचालय अब बंद हो चुका है। लाइनमैन रविन्द्र सिंह का कहना है कि लगभग 15 वर्ष से सभी रूम अब जर्जर हो चुके हैं जो कभी भी गिर सकते हैं। इसे लेकर पावर हाउस में तैनात कर्मचारियों में नाराजगी है। इस बारे में अधीक्षण अभियंता ग्रामीण डीके त्यागी ने बताया कि इसकी मरम्मत के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होगा।
अनेई उपकेंद्र की चारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा को खतरा है। आए दिन जानवर घुस जाते हैं जिसे भगाने के लिए कर्मचारियों को दिक्कत होती है। दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत गांव के उपकेंद्रों की हालत बदली जा रही है। बावजूद इसके अब तक इस उपकेंद्र की हालत नहीं सुधरी है। उपकेंद्र का मुख्य गेट भी काफी कमजोर है। परिसर खुला होने के कारण यहां बच्चे खेलते-खेलते स्विच यार्ड तक चले जाते हैं।