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सप्तऋषि आरती के अर्चक दल का विश्वनाथ धाम में प्रवेश प्रतिबंधित

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वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने सप्तऋषि आरती के अर्चक दल के नाम नोटिस जारी कर धाम क्षेत्र में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही मंदिर टूटने की अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि महंत परिवार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।
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मंदिर प्रशासन की ओर से जारी नोटिस कार्यालय, मंदिर परिक्षेत्र, धाम क्षेत्र और महंत परिवार के सात लोगों के आवास पर चस्पा कराया गया है। इससे पहले सात मई को भी नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद महंत परिवार के मुखिया डॉ. कुलपति तिवारी ने मंदिर प्रशासन से क्षमा मांगने की बात तो कही थी, लेकिन किसी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। बृहस्पतिवार को सप्तऋषि आरती का अर्चक दल जब आरती करने पहुंचा तो पास निरस्त होने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। इसके विरोध में अर्चकों ने गेट नंबर चार पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर बाबा की सप्तऋषि आरती की परंपरा निभाई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था। इस संबंध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने कहा कि मंदिर न्यास परिषद की आगामी बैठक में ही सप्तऋषि आरती के संबंध में विचार किया जाएगा। तब तक मंदिर के पुजारी और अर्चक सप्तऋषि आरती कराएंगे।
केंद्रीय ब्राह्मण महासभा ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी से अनुरोध किया है कि सप्तर्षि आरती की व्यवस्था को पहले की तरह महंत परिवार और उनके साथी अर्चकों को सौंप दें। धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने भी फेसबुक लाइव में महासभा सहित तमाम प्रबुद्धजनों ने व्यवस्था को बहाल करने की मांग की थी। महंत परिवार के मुखिया डॉ. कुलपति तिवारी ने भी इस मामले में माफी सार्वजनिक माफी मांगने की बात कही है। महासभा के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा, महामंत्री सीवी सुब्बा राव शास्त्री और पं. शिवदत द्विवेदी ने वक्तव्य जारी करते हुए मुख्य कार्यपालक से उदारता का परिचय देने का अनुरोध किया है। कहा है कि महंत परिवार और उनके साथ आरती करने वाले अर्चकों को अनुमति प्रदान कर दुखद प्रकरण का समापन करें। उन्होंने कहा कि महंत परिवार को भी दुष्प्रचार और काशी विश्वनाथ धाम जैसी योजना में बाधक नहीं बनना चाहिए। धर्मार्थ कार्य मंत्री से भी उन्होंने निवेदन किया है कि मामले में हस्तक्षेप करें। जो लोग झूठी प्रतिष्ठा का रूप प्रदान कर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं, उनकी साजिश को विफल कर सामंजस्य स्थापित कराकर जनमानस की भावन का सम्मान करें।
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