शाहंशाहपुर में लगा बायोगैस प्लांट अब पूरी क्षमता से चलने लगा है। अब यहां 90 टन गोबर के उपयोग से 1100 किलो कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) तैयार की जा रही है। जबकि पहले 55 टन गोबर के उपयोग से 650 किलो कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) बनाया जाता था। हालांकि नेपियर घास व चीनी मिलों से निकलने वाला वेस्ट के अभाव में उत्पादन पर कुछ असर पड़ रहा है। प्लांट के पूरी क्षमता से चलने से किसानों को फायदा मिल रहा है।
शाहंशाहपुर में सीबीजी गैस उत्पादन क्षमता वाले प्लांट का निर्माण सात एकड़ क्षेत्रफल में 23 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसमें प्रतिदिन 90 टन गोबर, प्रेसमड (चीनी मिलों से निकलने वाला वेस्ट) और नेपियर घास की जरूरत पड़ती है। लेकिन प्रेसमड और नेपियर घास न मिलने से प्लांट क्षमता के अनुसार उत्पादन नहीं कर पा रहा है। प्लांट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश प्रभु ने बताया कि प्लांट की क्षमता 3001 किलो सीबीसी गैस उत्पादन की है। बशर्ते इसके लिए 90 टन गोबर के साथ 30 टन नेपियर घास और 20 टन प्रेसमड (चीनी मिलों से निकलने वाला वेस्ट ) की जरूरत होगी। है जो अभी मिल नहीं पा रही है। अभी प्रेसमड और नेपियर घास नहीं मिल पा रही है। नेपियर घास की खेती के लिए पशुपालन विभाग से जमीन की मांग की गई है। कुछ चीनी मिलों से प्रेसमड खरीदने के के लिए बातचीत की गई है।