जानकी घाट के सामने सोमवार को खोजबीन करते गोताखोर।
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जल पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों ने बताया कि रोजाना सुबह, दोपहर और शाम के समय एनाउंस कर नाविकों को समझाया जाता है कि नाव की क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं। नाविकों को आगाह करने के लिए घाटों पर जगह-जगह फ्लैक्स भी लगाए गए हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाले नाविकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती, इस सवाल पर जल पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी कोई भी उत्तर नहीं दे पाए।
आठ लोगों की जान बचाने में नाविकों की अहम भूमिका
गंगा में डूबी नाव के नाविक, दो युवतियों और पांच युवकों की जान बचाने में भदैनी और आसपास के घाटों पर मौजूद नाविकों की ही अहम भूमिका रही। सोमवार को भदैनी घाट पर मौजूद नाविक भरोस साहनी ने बताया कि उन लोगों ने रविवार को जब नाव को गंगा में डूबते देखा तो अपनी नावें लेकर तेजी से आगे बढ़े। नाविक अंगद, दीपू और कृष्णा आदि की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।