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वाराणसी: न्यायालय के साथ साझेदारी करेगा बीएचयू, बढ़ेंगी मुफ्त कानूनी सेवाएं; पढ़ें- पूरी जानकारी

Wed, 26 Aug 2026 04:44 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बीएचयू न्यायपालिका के साथ साझेदारी करेगा। इससे छात्रों की मुफ्त कानूनी सेवाएं सक्रिय होगी। दो निजी रैंकिंग में टॉप 10 में स्थान मिलने के बाद अत्याधुनिक कानूनों पर शोध बढ़ाने का निर्णय हुआ।
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बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU - फोटो : X (@bhupro)
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बीएचयू में न्यायिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए न्यायपालिका के साथ साझेदारी बढ़ेगी। छात्रों की प्रो-बोनो यानी कि मुफ्त कानूनी सेवा पहल को फिर से सक्रिय किया जाएगा। वहीं, विधि संकाय में अत्याधुनिक कानूनी शोधों की संख्या बढ़ाने के साथ ही यहां के छात्र-छात्राओं को इंडस्ट्री से भी जोड़ा जाएगा। ये जानकारी विधि संकाय के हेड व डीन प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने बीएचयू प्रशासन को दी।

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उन्होंने दो निजी रैंकिंग का हवाला देते हुए बताया कि भारत में कानूनी शिक्षा और मुफ्त कानूनी सेवा के क्षेत्र में बीएचयू के विधि संकाय को दो निजी रैंकिंग में टॉप 10 संस्थानों में स्थान मिला है। 78.53 रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट स्कोर के साथ 10 बेस्ट वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेज की सूची में देशभर में विधि संकाय का पहला स्थान हैं। लॉ संस्थानों की एक अन्य रैंकिंग में 1428.1 के कंपोजिट स्कोर के साथ संकाय को 13वां स्थान मिला। वहीं, दूसरी निजी रैंकिंग में बीएचयू को आठवां स्थान मिला।

शिक्षा और न्याय तक पहुंच के लिए सम्मान
इन रैंकिंग में बीएचयू का मूल्यांकन केवल संस्थागत स्कोर कार्ड के आधार पर नहीं बल्कि क्लिनिकल लीगल एजुकेशन और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में फैकल्टी के योगदान के आधार पर भी किया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट लीगल एड थ्रू लॉ स्कूल्स: ए रिपोर्ट ऑन वर्किंग ऑफ लीगल एड सेल्स इन इंडिया को भी आधार बनाया गया है। यह रिपोर्ट सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग ने प्रकाशित की है।
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कैदियों की दिहाड़ी बढ़ाने की लड़ाई बीएचयू ने लड़ी
यह प्रकाशन के मुताबिक, बीएचयू ने 1970 के दशक की शुरुआत में भारत में क्लिनिकल लॉ कोर्स शुरू किया था। संस्थान ने ऐसा मॉडल विकसित किया जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में क्लिनिक-आधारित कानूनी सहायता, अदालतों का दौरा और प्रैक्टिशनर इंटर्नशिप शामिल थी। 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में बीएचयू के ''लीगल एड एंड सर्विसेज क्लिनिक'' की ओर से दायर क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कैदियों की दिहाड़ी बढ़ाने और जेलों में भीड़ कम करने के लिए अतिरिक्त सुधार गृह बनाने की दिशा में कदम उठाए।

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