जंगलों से आते हैं भेले और कैथ के फल
मेले में मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली समेत आसपास के जंगलों से भेले के फल लाए जाते हैं। इसके अलावा कैथ नामक जंगली फल भी यहां बिकता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोग इन फलों का इस्तेमाल औषधीय प्रयोजनों के लिए करते हैं। हालांकि, इनके सेवन से दमा, अस्थमा और गठिया जैसी बीमारियों में लाभ होने के दावों की चिकित्सकीय पुष्टि जरूरी है।
घरेलू सामान की भी होती है बिक्री
भेले के फल के अलावा मेले में घरेलू उपयोग की कई वस्तुएं भी मिलती हैं। इनमें दौरा, सूप, चलनी, चौका-बेलन और बांस से बनी टोकरियां शामिल हैं। इस तरह मेला केवल पारंपरिक फल और चिकित्सा पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण हस्तशिल्प और घरेलू जरूरतों से जुड़े सामान की खरीदारी का भी केंद्र बनता है।
सामाजिक सद्भाव की भी मिसाल
भेले के मेले में अलग-अलग धर्मों और वर्गों के लोग पहुंचते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के लोग भी भागीदारी करते हैं। दीपावली के अवसर पर लगने वाला यह मेला काशी की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मेलजोल की अनूठी झलक पेश करता है।