यम द्वितीया पर सोमवार को बहनों ने भाइयों के प्रति स्नेह की अभिव्यक्ति अनूठे अंदाज में की। भाई दूज पर व्रत रखकर बहनों ने पहले तो भाइयों के लिए भला बुरा कहा फिर जीभ पर गुम भटकैया के कांटे चुभाए। गंगा तट, कुंडों पर गोधन कूटने के लिए महिलाओं का रेला उमड़ पड़ा। बहनों ने गोधन कूटे। भाईयों को भला-बुरा कहने के बाद पश्चाताप भी किया।
सोमवार को भैया दूज की पूजा के लिए शहर से ग्रामीण इलाके तक उत्सव जैसा माहौल नजर आया। कभी यमी ने अपने भाई यमराज के लिए यह पूजा की थी। सुबह ही बहनें गोधन कूटने के लिए घरों से निकल पड़ीं। गोवर्धन बनाए और फि र चावल के घोल से चौक बनाकर पूजा की। अस्सी स्थित पुष्कर तालाब के अलावा अस्सी घाट, ईश्वरगंगी तालाब, बौलिया, चांदपुर, मंडुवाडीह, भिखारीपुर समेत कई इलाकों में बहनों ने भैया-दूज व्रत रखकर गोधन की पूजा की। भाई दूज पर गंगा घाट पर स्नान के बाद महिलाओं ने घाटों, कुंडों के अलावा गलियों में समूहों में वेदियां बनाकर पूजा की। इस दौरान गोधन कूटने के साथ ही पहले भाइयों को श्राप दिए गए। फिर बहनों ने अपनी जीभ में कांटे चुभोकर प्रायश्चित भी किया। इसके बाद समूहों में महिलाओं ने गोधन कुटा। भाइयों ने भी बहनों के घर पहुंच कर प्रसाद ग्रहण किया और उन्हें उपहार भेंट किया। वहीं ग्रामीण इलाकों में सुबह महिलाओं ने गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाई और फि र चूड़ा, लाई, घरिया आदि से उसकी पूजा की। इस दौरान मंगल गीत भी गाए गए। चौबेपुर क्षेत्र के अजांव, बर्थरा खुर्द, गरथौली, चुमकुनी, चौबेपुर, डुबकिया, कैथी आदि गांवों में गोवर्धन पूजा और भइया दूज का त्योहार मनाया गया। दानगंज क्षेत्र के बाबतपुर, नियार, रजला, ऊधो रामपुर, दानगंज, अजगरा गांवों में आयोजन हुए। इसी तरह अहिरौली, पुआरीकला, पुआरीखुर्द, हरहुआ बाजार और काजीसराय आदि गांवों में भी गोवर्धन की पूजा हुई।