बाजारों में भीड़ तो है लेकिन खरीदारी हो रही सीमित
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के अधिकतर एटीएम में कैश का संकट जिस तरह से 15-20 दिनों से बना है, उससे नोटबंदी जैसे हालात हो गए हैं। ईद की खरीदारी का दौर तो शुरू हो गया है लेकिन ज्यादातर एटीएम में कैश की कमी के चलते खरीदारी सीमित हो रही है।
यूं तो बड़े-बड़े शोरूम व दूकानों में पर कैशलेस की व्यवस्था है इस लिहाज भले वहां कोई दिक्कत नहीं हो रही है लेकिन जहां कैशलेस की व्यवस्था नहीं है वहां ग्राहकों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। ईद का सबसे बड़ा बाजार दालमंडी और नई सड़क है।
यहां पर अधिकतर दूकानों पर कैशलेस की व्यवस्था नहीं है, जिससे परेशानी हो रही है। दालमंडी के कास्मेटिक व ज्वेलरी विक्रेता इमरान ने बताया कि इस बार ईद की खरीदारी बड़ी सीमित हो गई है।
पहले जहां 15 रमजान तक 40 फीसदी तक कारोबार हो जाता था, वहीं इस बार 20 से 25 फीसदी तक ही कारोबार हुआ है। होम फर्निश्ंिाग के कारोबार से जुड़े सईद ने बताया कि ईद के दौरान कपड़ों से लेकर ज्वेलरी, फुटवियर, होम फर्निशिंग सभी की खरीदारी होती है।
अब हर दूकानदार के पास कैशलेस की व्यवस्था तो नहीं है। नोटबंदी के बाद से ये दिक्कत कई बार आ चुकी है। इससे हमारा कारोबार प्रभावित हो रहा है।
एक नजर में आंकड़ा
650 से अधिक एटीएम जिले में
50 करोड़ रुपये की हर दिन निकासी
कैश संकट दूर करने को चाहिए 1000 करोड़
शहर के अधिकांश एटीएम में लगा है नो कैश का बोर्ड
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जिले के अधिकांश बैंकों के एटीएम में कैश की किल्लत दूर नहीं हो पा रही है। एसबीआई, यूनियन बैंक, बैंक आफ बड़ौदा सहित कई बैंकों में नो कैश का बोर्ड लगा है, इस वजह से लोगों को निराश लौटना पड़ा है। आरबीआई की ओर से नई करेंसी न भेजा जाना इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है।
इस बीच बैंकों ने आरबीआई से 1000 करोड़ रुपये मांगे हैं। अगर इतना कैश मिल जाए तो कुछ हद तक समस्या दूर हो जाएगी। कैश का संकट जिस तरह से 15-20 दिनों से बना है, उससे नोटबंदी जैसे हालात हो गए हैं। बैंकों के जमा काउंटर पर जहां रुपये जमा करने वालों कीस संख्या घटी है वहीं लगभग सभी बैंकों के एटीएम खाली हो गए हैं।
इसमें एसबीआई, यूनियन बैंक, एचडीएफसी, बैंक आफ बड़ौदा के दुर्गाकुंड, लंका, भिखारीपुर, सुंदरपुर, लहुराबीर, लहरतारा, चांदपुर रविंद्रपुरी आदि इलाकों में कई एटीएम के शटर आधा गिरे हैं और गार्ड लोगों के गुस्से से बचने के लिए किनारे बैठे रह रहे हैं।
आरबीआई से 500 और 2000 की पर्याप्त नई करेंसी नहीं भेजी जा रही है। सोमवार को बैंकों में नकदी के लिए ग्राहकों की भीड़ लगी रही लेकिन नकदी न होने की वजह से बैंकों की ओर से उसकी सीमा तय कर दी गई हैं।
अग्रणी बैंक प्रबंधक रंजीत सिंह के मुताबिक नगदी न मिलने की वजह से ही इस तरह की समस्या बनी है। आरबीआई की ओर से 1000 करोड़ रुपये मिले तब जाकर कुछ हद तक समस्या दूर होगी। इसके लिए पत्र व्यवहार किया जा रहा है। बताया कि जिनके पास नई करेंसी है, वह जमा भी नहीं कर रहे हैं, जिससे कि संकट कम हो।