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वाराणसी: 1.71 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप, जनरल मैनेजर समेत चार आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

Fri, 30 Oct 2026 12:20 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में 1.71 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में जनरल मैनेजर समेत चार आरोपियों को राहत नहीं मिली। अदालत ने चारों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपियों पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप है। मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
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वाराणसी कोर्ट ने सुनाया फैसला। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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छावनी स्थित मदीन होटल में नकदी के कथित गबन और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने होटल के तत्कालीन जनरल मैनेजर समेत चार आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने सुनवाई के बाद हिमाचल प्रदेश निवासी संदीप पटियाल, रोहनिया के फरीदपुर निवासी कौशल कुमार सिंह, अर्दली बाजार के विंध्यवासिनी नगर निवासी प्रदीप कुमार तिवारी और लंका निवासी अनूप सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया।

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अभियोजन के अनुसार, वादी तरुण कुमार दीक्षित मदीन होटल के निदेशक के सलाहकार हैं। उन्होंने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि होटल में लंबे समय से कार्यरत कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध लगने पर नकदी और बैंक में जमा धनराशि का मिलान कराया गया। इस दौरान रिकॉर्ड में दर्ज रकम और वास्तविक नकदी के बीच भारी अंतर सामने आया। 

शिकायत के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक होटल में 2 करोड़ 6 लाख 72 हजार 991 रुपये की नकदी होनी चाहिए थी, लेकिन मौके पर केवल 55 लाख रुपये मिले। इस तरह 1 करोड़ 51 लाख 72 हजार 991 रुपये की कमी बताई गई। वहीं, एक अप्रैल से आठ सितंबर 2026 के बीच के रिकॉर्ड में 25 लाख 85 हजार रुपये की नकदी होने का दावा किया गया, जबकि मौके पर केवल 5 लाख 91 हजार 979 रुपये मिले। इस अवधि में 19 लाख 93 हजार 21 रुपये की कमी सामने आने का आरोप लगाया गया है।

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सीए की जांच में भी हेराफेरी का आरोप 
होटल प्रबंधन ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) से खातों का सत्यापन भी कराया। शिकायत के अनुसार, जांच रिपोर्ट में 1 करोड़ 71 लाख 65 हजार 41 रुपये और तीन पैसे की कमी सामने आई। प्रबंधन का आरोप है कि पूछताछ के दौरान संबंधित कर्मचारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे और सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी होने की बात कहते रहे। हालांकि, आंतरिक जांच में सॉफ्टवेयर में कोई त्रुटि नहीं मिलने का दावा किया गया। 

वादी पक्ष ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने आपसी साजिश के तहत होटल के रिकॉर्ड में हेराफेरी की और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए प्रबंधन को गुमराह किया। इन्हीं आरोपों के आधार पर दर्ज मामले में चारों आरोपियों ने अग्रिम जमानत की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
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महिला दरोगा से छेड़खानी के आरोपी को मिली अग्रिम जमानत
घर लौट रही महिला दरोगा से छेड़खानी करने, अश्लील इशारे करने और मारपीट करने के आरोपी को अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने पांडेयपुर निवासी वैभव गुप्ता को गिरफ्तारी की स्थिति में 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और निजी मुचलका दाखिल करने पर जमानत देने का आदेश दिया। 

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांडेयपुर क्षेत्र की निवासी महिला दरोगा ने लालपुर-पांडेयपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि वह अपने कमरे पर लौट रही थीं, तभी बाइक सवार एक युवक उनका पीछा करने लगा। युवक ने उनके साथ चलने को कहा और अश्लील इशारे करते हुए बार-बार उनके आगे बाइक रोकने लगा। 

आरोप है कि विरोध करने पर युवक ने उनका हाथ पकड़ लिया और मारपीट करते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। शोर मचाने पर युवक जान से मारने की धमकी देते हुए बाइक मौके पर छोड़कर भाग गया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि महिला दरोगा ने बाइक के कागजात की जांच करने के नाम पर वाहन रोका था। 

अधिवक्ताओं के अनुसार, सभी कागजात सही होने के बावजूद महिला दरोगा ने गाली-गलौज की और आरोपित को फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। बचाव पक्ष का दावा था कि इसी कारण आरोपित बाइक छोड़कर चला गया और बाद में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपित को अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया।
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