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वाराणसी: दरोगा बना तो पहली पत्नी को छोड़ा, सिपाही से दूसरी शादी कर ली; आठ मामलों में भरण-पोषण का आदेश दिया

Wed, 30 Sep 2026 06:45 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में पारिवारिक विवाद से जुड़े 14 मामलों में अदालत ने आठ मामलों में भरण-पोषण देने का आदेश दिया। एक मामले में आरोप है कि दरोगा बनने के बाद पति ने पहली पत्नी को छोड़ दिया और सिपाही से दूसरी शादी कर ली। अदालत ने पहली पत्नी के भरण-पोषण का आदेश दिया। अन्य मामलों में भी पीड़ित महिलाओं को राहत मिली।
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वाराणसी कोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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शादी के बाद पत्नी को छोड़ने, पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी करने और तलाक नहीं देने जैसे 14 मामले अदालत पहुंचे हैं। अभियोजन के अनुसार, इन मामलों में महिलाओं ने वैवाहिक जीवन से जुड़े विवादों, उत्पीड़न और पति के दूसरी महिला से संबंध होने की शिकायत दर्ज कराई है। 

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एक महिला ने आरोप लगाया कि दरोगा बनने के बाद पति ने उसे छोड़ दिया और दूसरी शादी एक सिपाही से कर ली। इसी तरह उत्तराखंड की एक महिला न्याय की उम्मीद में वाराणसी आई है। वह एक गेस्ट हाउस में रुकी है। अदालत ने तीन महीने के दौरान 14 में से आठ मामलों में भरण-पोषण का आदेश दिया है। 

केस 1- सारनाथ की एक महिला की 16 साल पहले शादी हुई। 14 साल की बेटी है। शादी के दो साल बाद ही पति ने थाना क्षेत्र निवासी एक सिपाही से शादी कर ली। पहली पत्नी को तलाक का नोटिस भेजा। महिला ने 2017 में कोर्ट में भरण पोषण की अर्जी दाखिल की। 21 जुलाई 2026 को महिला को पति के घर में रहने और हर महीने 25 हजार रुपये भरण पोषण के लिए देने का आदेश हुआ। 

केस 2- उत्तराखंड निवासी युवती से पहली शादी छिपाकर एक सैन्यकर्मी ने शादी की। चार साल का बेटा भी है। वर्तमान में महिला कैंट थाना क्षेत्र एक गेस्टहाउस में रहकर पति से संपर्क की कोशिश कर रही है लेकिन मुलाकात नहीं हो पा रही। कैंट थाने शिकायत भी दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

केस 3- चोलापुर निवासी एक महिला की शिकायत थी कि पति ने मामूली विवाद में इतना पीटा कि एक हाथ और गर्दन की हड्डी टूट गई। महिला फिलहाल अपने मायके में रह रही है। उसके दो बच्चे हैं। पति उसे अपने साथ रखना नहीं चाहता। साल 2025 में कोर्ट में भरण पोषण की अपील की। आदेश के बाद कुछ महीने उसे भरण पोषण मिला लेकिन बाद में पति ने देना बंद कर दिया।
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एक महीने में वन स्टॉप सेंटर पहुंचे 60 मामले
वन स्टॉप सेंटर के चार केंद्रों पर एक महीने में विवाहेत्तर संबंधों से जुड़े 60 से अधिक मामले सामने आए। इनमें कुछ महिलाएं अपने वैवाहिक अधिकारों को लेकर न्यायालय पहुंची हैं। अभियोजन के मुताबिक, मामलों में सुनवाई जारी है।
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