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होली के त्योहार पर बरतें सावधानी, मिलावटी रंग कहीं कर न दे रंग में भंग

Thu, 01 Mar 2018 02:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बाजार में बिकने वाले सफेद पॉलिश में सबसे अधिक केमिकल का मिश्रण होता है। - फोटो : demo
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रंगो का पर्व होली आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। इस त्योहार के मद्देनजर बाजार में सिंथेटिक और मिलावटी रंग और गुलाल की भरमार है। केमिकलयुक्त ये रंग और गुलाल रंग में भंग डाल देते हैं। कई बार इन रंगों के चलते लोगों के जान पर बन आती है। इससे बचने के लिए विशेष एहतियात की जरूरत है।
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फूलों की होली या फिर फूलों की पंखुड़ियों को सुखाकर बनाए गए गुलाल से खेलना सेहत के लिए लाभदायक होता है।  केमिकलयुक्त रंगों से जहां चर्मरोग सहित कई बड़ी बीमारियां होती हैं। वहीं, मिलावटी रंगों का कारोबार करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई तक नहीं की जा रही।

बाजार में मिलावटी रंग, सस्ते दर पर बेचा जा रहा है। एक किलो गुलाल 70 से 80 रुपए में आसानी से बेचा जा रहा है। गुलाल में मार्बल व अभ्रक का टुकड़ा मिला होता है। रंगों का कारोबार करने वाले व्यापारी, पॉलीथीन में गुलालों को पैक कर बेच रहे हैं।
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बाजार में बिकने वाले सफेद पॉलिश में सबसे अधिक केमिकल का मिश्रण होता है। पूर्वांचल में एक हजार क्विंटल रंग और गुलाल की खपत होती है।

किस मिलावटी रंग से कौन सी बीमारी

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काला रंग- इससे लेड ऑक्साइड होता है जो शरीर से रिसकर अंदर चला जाए तो किडनी भी खराब कर सकता है।
हरा रंग-कॉपर सल्फेट होता है। इससे आंख व चेहरे में सूजन आ जाती है। एलर्जी हो जाती है।
सिल्वर रंग- इससे स्किन कैंसर होने का खतरा रहता है।
नीला रंग- सफेद रंग का दाग हो सकता है। त्वचा पर एलर्जी हो सकती है।
लाल रंग- इसमें मरक्यूरी सल्फाइड होता है जो स्किन कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है।
गुलाल- मिलावटी गुलाल से सेहत पर असर पड़ता है। इससे फेफड़ों की बीमारी का खतरा बना रहता है। स्टार्च भी रंग के साथ हानिकारक होता है। गुलाल का प्रभाव बालों पर पड़ता है।

घर पर बनाएं हर्बल रंग 
गुलाब, गेंदा व अन्य फूलों की पंखुड़ियों को धूप में सूखा लें। उसका गुलाल बनाकर खेले। इसके अलावा ताजे फूलों से भी होली खेली जाती है। इसके अलावा रोली, हल्दी का घोल बनाकर रंग खेल सकते हैं। 
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रंगों से फंगल इंफेक्शन का खतरा

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 चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि रंगों से फंगल इंफेक्शन और एलर्जी का खतरा रहता है। इससे शरीर पर चकत्ते, दाने, खुजली आदि होने लगते हैं। रंग पड़ने के बाद तत्काल साबुन से धोएं और पूरी तरह सुखाने के बाद एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं। आराम न मिले तो डाक्टर के पास जरूर जाएं।

बीएचयू अस्पताल के  नेत्र रोग विभाग के प्रो.एमके सिंह ने कहा कि रंगों से आंखों को बचाना चाहिए। प्राय: आंख में रंग पड़ जाने से कार्निया जाने का खतरा होता है। सावधानी न बरतने से आंखों में जलन, धुंधला दिखाई देने की आशंका अधिक रहती है।

सभी अस्पतालों में अलर्ट, 10-10 बेड सुरक्षित 
होली के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी कर ली है। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में दस-दस बेड सुरक्षित किए गए हैं। जिला, मंडलीय, महिला अस्पतालों के साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों को तीन मार्च तक अलर्ट कर दिया गया है। विशेष रूप से नेत्र रोग विभाग, चर्म रोग विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों, कर्मचारियों को सतर्क रहने को कहा गया है। ताकि अस्पताल पहुंचने वालों को कोई असुविधा न हो। 
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