राजस्थानी वास्तु शिल्प की नायाब कारीगरी की मिसाल बलुआ पत्थरों से निर्मित मान महल अपने आप में बेजोड़ है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (सारनाथ मंडल) द्वारा संरक्षित यह धरोहर काशी के मान बिंदुओं में से एक है।
दस्तावेज में कहानी
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुसार, खगोल विद्या के राष्ट्रव्यापी प्रसार को ध्यान में रखते हुए राजा जय सिंह ने 1724 में दिल्ली, 1719 में उज्जैन, 1737 में मथुरा और सन् 1728 में जयपुर में भी ऐसी वेधशालाओं का निर्माण कराया था। अलग-अलग खगोलीय यंत्रों से पहला परिचय वास्तव में है ही इतना रोमांचकारी। शायद ऐसी ही अनुभूतियों के कारण कई जगहों पर इन वेधशालाओं की पहचान जंतर-मंतर के रूप में ही है।
छत पर पहला कदम रखते ही वेधशाला के दक्षिणी कोण पर हमारा परिचय होता अर्ध परवलय की आकृति से अंकित दक्षिणोत्तर भित्ति यंत्र से जिससे ग्रह-नक्षत्रों के अंतर और नतांश नापे जाते हैं।