सर्व विद्या की राजधानी बनारस संगीत-कला की ही नहीं, ईमानदार और आदर्श राजनीति का भी गढ़ रही है। कबीर, तुलसी, रैदास की इस धरती ने देश को राष्ट्रपति से लेकर पीएम, राज्यपाल से लेकर सीएम तक दिए हैं। अस्सी-गोदौलिया की अड़ियों, गंगा घाटों की ऊर्जा ने राष्ट्र निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राजनेता पैदा किए हैं।
अमर उजाला ऐसी राजनीतिक हस्तियों की सादगी, ईमानदारी, दूरदर्शिता और राजनीतिक कुशलता से आपको परिचित कराएगा।
आज जानिए जालपा देवी मुहल्ले में कभी यूपी की सियासत का गढ़ रहे डॉ. संपूर्णानंद का सीएम निवास के बारे में।
इस घर में कभी बाबूजी (डॉ. संपूर्णानंद) तपती दोपहरी में जमीन पर ही सोते थे। साठ के राजनीतिक दशक में गोला दीनानाथ के पीछे जालपा देवी मुहल्ले की गली में सीएम निवास के तौर पर सुर्खियों में रहा मकान अब फलाहार स्टोर बन चुका है।
बनारस के पहले मेयर रहे बाबू कुंज बिहारी गुप्त के घर के ठीक सामने वाला मकान पूर्व सीएम डॉ. संपूर्णानंद का है।
अब तो कुछ वर्ष सांसद, विधायक या मंत्री बनने पर नेता अरबों की संपत्ति बना लेते हैं, कई शहरों में बंगले, इमारतें बन जाती हैं। नाते-रिश्तेदारों की नौकरियां लग जाती है लेकिन 1954-59 तक यूपी के सीएम रहे संपूर्णानंद के मकान का प्लास्टर तक कभी दुरुस्त नहीं हो सका था।
करीब 15 वर्ष पहले इस मकान को पड़ोस के ही प्रताप कुमार ने खरीद लिया था और अब वह उसी में फलाहारी वस्तुओं का भंडारण करते हैं लेकिन दो मंजिला भवन अभी पहले जैसा ही है।
सादगी-ईमानदारी, स्पष्टवादिता के प्रतीक रहे स्वतंत्रता सेनानी डॉ. संपूर्णानंद के इस मकान में कभी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, पं. कमलापति त्रिपाठी सरीखे राजनेता देश की नीतियों पर घंटों गुफ्तगू किया करते थे।
संस्कृत, फारसी, बांग्ला और उर्दू भाषाओं पर उनका समान अधिकार था।
अमर उजाला संवाददाता ने जब जालपा देवी मुहल्ले में उनके घर की तलाश शुरू की तो तमाम लोग इस तथ्य से वाकिफ ही नहीं थे। रतन कुमार ने गुलाबी रंग वाले मकान की ओर इशारा किया। वहां पार्षद सीताराम केशरी ने सामने के एक मकान की ओर यह कहते हुए इशारा किया कि कभी बाबू जी इसी घर में रहते थे।