उत्तर प्रदेश पुलिस की सिपाही भर्ती परीक्षा के पहले दिन शुक्रवार को अभ्यर्थियों को कंगन, कड़ा, कलावा, अंगूठी और चेन परीक्षा केंद्र के बाहर उतारना पड़ा। इसके बाद बायोमेट्रिक सत्यापन हुआ और फिर उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश मिला। पहली पाली में 33984 अभ्यर्थियों में 21797 ही परीक्षा देने आए और 12187 अनुपस्थित रहे। दूसरी पाली में 33984 अभ्यर्थियों में 22510 ही परीक्षा देने आए और 11474 अनुपस्थित रहे। इस तरह से पहले दिन 67968 अभ्यर्थियों में 44307 ने परीक्षा दी और 23661 नहीं आए।
सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर गुरुवार की शाम से ही कमिश्नरेट की पुलिस हाई अलर्ट मोड पर थी। शुक्रवार की सुबह परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों को पुलिस मोबाइल सहित अन्य सामान निर्धारित स्थान पर रखने और किसी भी किस्म की गड़बड़ी का प्रयास न करने के लिए आगाह करती नजर आई।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी एस. राजलिंगम के साथ ही कमिश्नरेट और जिला प्रशासन के सभी अफसर सड़कों पर नजर आए। दोपहर 12 बजे पहली पाली और शाम पांच बजे दूसरी पाली की परीक्षा खत्म होने पर आवागमन की व्यवस्था सुचारु करने के लिए ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर नजर आई। इसके बावजूद भिखारीपुर तिराहा से ककरमत्ता पुल होते हुए बनारस स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार ट्रैफिक का दबाव दिखा। कुछ ऐसी ही स्थिति महमूरगंज से रथयात्रा मार्ग, गुरुबाग, कबीरचौरा और मैदागिन क्षेत्र में भी रही।
अभ्यर्थी बोले- गणित के सवाल उलझाने वाले और कठिन थे
जगतपुर इंटर कॉलेज के बाहर पलवल, हरियाणा से आए शाहिल सोरौत ने कहा कि पेपर ठीक था। मगर, गणित के प्रश्न कठिन थे। मऊ के मधुबन निवासी मनीष कुमार ने कहा कि गणित के प्रश्न काफी कठिन थे। इस वजह से पेपर सॉल्व करने में दिक्कत हुई। फूलपुर, प्रयागराज निवासी अभिषेक कुमार ने कहा कि पेपर ठीक था, लेकिन गणित के सवालों ने उलझा दिया। मऊ के शिवाजीत यादव ने कहा कि इस बार से भी अच्छा पेपर पिछली बार का था। सभी प्रश्नों को हल किया है। आगे अब किस्मत सब कुछ तय करेगी।
आने में दिक्कत हुई, लड़कियों का सेंटर उनके जिले में हो
प्रतापगढ़ के राहुल त्रिपाठी ने कहा कि तैयारी अच्छी थी, इसलिए पेपर कठिन नहीं लगा। प्रतापगढ़ से बनारस और फिर गांव में बने परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में दिक्कत हुई। बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों का सेंटर शहर में ही होना चाहिए। चंदौली के चकिया की पूजा कुमारी ने कहा कि जिन सवालों को लेकर संशय था, उन्हें छोड़ दिया। लड़कियों का परीक्षा केंद्र उनके जिले में ही बनाया जाना चाहिए। आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है।