उम्मीद है कि आगामी 26 मार्च के बाद पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है। इसके बाद इन चुनावों के लिए नामांकन दाखिले का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वहीं चुनाव और होली का माहौल साथ होने से राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने अधिकारियों को उपद्रवियों पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया है। वहीं आरक्षण को लेकर असंतुष्ट लोग आपत्तियां दर्ज करवा रहे हैं।
डीपीआरओ शाश्वत आनंद सिंह ने बताया कि 200 से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं। मंगलवार तक आने वाली आपत्तियों का निस्तारण कर 26 मार्च को फाइनल सूची जारी की जाएगी। प्रधान पद के लिए काशी विद्यापीठ ब्लाक कार्यालय पर विभिन्न गांवों आरक्षण को लेकर अब तक दस आपत्तियां आईं हैं। आयोग के गाइडलाइन के अनुसार कोविड प्रोटोकाल का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
जन्म से मानी जाएगी जाति
पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण के बाद कइयों के समीकरण बिगड़ गए हैं। अमूमन लोग दूसरी जाति में विवाह करके आरक्षण का लाभ लेने का प्रयास करते हैं। लेकिन चुनाव आयोग की गाइड लाइन के अनुसार विवाह करने मात्र से व्यक्ति की जाति नहीं बदलेगी। जन्म से ही व्यक्ति की जाति का निर्धारण होता है। पंचायत के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी राजाराम वर्मा ने बताया कि महिला या पुरुष किसी भी जाति में विवाह करें। तब भी उस महिला व पुरुष की जाति जन्म से मानी जाती है। अत: ऐसे लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा।
चुनाव चिह्न में कोई पाएगा ओखली तो कोई तराजू
आयोग की सूची में चुनाव चिन्ह के रूप में ओखली मौजूद है। इसी प्रकार करनी, गदा, चारपाई, टोकरी, डेस्क, तांगा, ड्रम, धनुष, फावड़ा, पालकी, बांसुरी, बैलगाड़ी, आटा चक्की, कुआं, गुल्ली डंडा, भगोना, तलवार, सरौता, टाइप राइटर, तराजू, फावड़ा-बेल्चा, लट्टू, हल, हथ-ठेला, सपेरा, डमरू, फरसा, शंख, खड़ाऊं, , स्लेट, हंसिया, हारमोनियम, कलम दवात आदि चुनाव-चिह्न वर्षों से जस के तस हैं।