नगर निगम के 4852 मतदाताओं को मेयर पद का कोई उम्मीदवार नहीं भाया और उन्होंने नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) का बटन दबाया। नोटा से भी कम मत पाने वालों में निर्दलीय प्रत्याशी ओम प्रकाश चौरसिया, दीपक लाल और शमशेर खान का नाम शामिल है। शमशेर खान को 2140, दीपक लाल को 2879 और ओम प्रकाश चौरसिया को 4114 मत मिले।
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वाराणसी में मेयर पद पर भाग्य आजमा रहे सपा के ओम प्रकाश सिंह की जमीन इस चुनाव में खिसक गई। जिस वार्ड में पिछले 30 साल से वह व उनके पारिवारिक सदस्य पार्षद रहे, वहां भी चुनाव हार गए हैं। तीन दशक बाद कमल खिला है। भाजपा के विवेक कुशवाहा पार्षद बने हैं।
भाजपा प्रत्याशी अशोक तिवारी और सपा प्रत्याशी ओपी सिंह सिगरा के पास छित्तूपुर वार्ड के ही निवासी हैं। इस वार्ड में पिछले 30 साल से सपा के ओपी सिंह और उनके परिवार का कब्जा रहा है। इस बार भाजपा ने मेयर प्रत्याशी के तौर पर इसी वार्ड के अशोक तिवारी को मैदान में उतारा तो इस लहर में सपा के ओपी सिंह का वर्चस्व अपने ही वार्ड में टूट गया। भाजपा ने न केवल रणनीति बनाई बल्कि संगठन के पदाधिकारियों और प्रत्याशियों को वार्ड में मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।