प्रेक्षक सुभाष चंद्र शर्मा, जिला निर्वाचन अधिकारी कौशल राज शर्मा, सहायक रिटर्निंग अफसर व एडीएम (प्रशासन) रणविजय सिंह ने भ्रमण कर कई बूथों का जायजा लिया। शहर और इससे सटे नगर निगम कार्यकारिणी कक्ष, जिला पंचायत मीटिंग हाल, नगर पालिका परिषद रामनगर, काशी विद्यापीठ समेत चोलापुर, हरहुआ, पिंडरा, चिरईगांव, बड़ागांव, आराजी लाइन और सेवापुरी विकास खंडों में बने मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने मतदान किया।
वाराणसी के दो मतदान केंद्रों पर 100 फीसदी मतदान
वाराणसी जिले के 11 में से दो मतदान केंद्रों क्षेत्र पंचायत कार्यालय सेवापुरी और नगर पालिका परिषद रामनगर में 100 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। रामनगर में सभी 27 और सेवापुरी में सभी 205 मतदाताओं ने अपना मताधिकार का उपयोग किया। इसके अलावा क्षेत्र पंचायत कार्यालय बड़ागांव 95.96, क्षेत्र पंचायत कार्यालय पिंडरा में 99.59, क्षेत्र पंचायत कार्यालय चोलापुर में 99.52 , क्षेत्र पंचायत कार्यालय चिरईगांव में 98.41, क्षेत्र पंचायत कार्यालय हरहुआ में 98.28 , क्षेत्र पंचायत कार्यालय आराजीलाइन में 97.74, क्षेत्र पंचायत कार्यालय काशी विद्यापीठ में 95.11, जिला परिषद मीटिंग हॉल में 90.91, नगर निगम वाराणसी कार्यकारिणी कक्ष में 97.87 फीसदी मतदान हुआ।
वाराणसी में इस बार एमएलसी चुनाव भाजपा और निवर्तमान एमएलसी बृजेश सिंह के परिवार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 24 सालों से बनारस की इस सीट पर बृजेश सिंह या उनके परिवार का ही कब्जा रहा है। सेंट्रल जेल में बंद निवर्तमान एमएलसी बृजेश सिंह के बड़े भाई उदयभान सिंह उर्फ चुलबुल सिंह एमएलसी सीट पर वर्ष 1998 में एमएलसी बने।
दो बार एमएलसी चुने गए और पंचायत चुनाव में उनका दबदबा जगजाहिर ही है। इसके बाद वर्ष 2010 में बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह बसपा के टिकट से इस सीट पर एमएलसी बनी। इसके बाद वर्ष 2016 में बृजेश सिंह मैदान में उतरे तो भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया और उनके खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं उतारा।
हालांकि इस बार भाजपा ने प्रत्याशी उतारकर बृजेश सिंह को वॉकआउट देने से इनकार कर दिया। ऐसे में अब परिणाम पर सबकी निगाह टिकी है। अन्नपूर्णा सिंह, भाजपा प्रत्याशी सुदामा पटेल और सपा प्रत्याशी उमेश कुमार यादव ने जीत का दावा किया है।