जौनपुर की सियासत में बाहुबली धनंजय सिंह कभी खुद चुनाव लड़े तो कभी पत्नी को चुनाव लड़ाया। उन्होंने हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाया। धनंजय अब तक तीन बार लोकसभा और सात बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
पूर्व सांसद धनंजय सिंह की बीते दो दशक से जौनपुर की सियासत में सीधी पैठ है। कभी वह खुद तो कभी अपनी पत्नी को यहां से चुनाव लड़ते-लड़ाते रहे हैं। 2002 के बाद 2019 में पहला मौका था जब धनंजय या उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ा। इसके अलावा उन्होंने हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाया।
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धनंजय अब तक तीन बार लोकसभा और सात बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। बहरहाल, धनंजय सिंह की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकला रेड्डी को बसपा से टिकट मिलने से जौनपुर की सीट पर चुनावी घमासान तेज हो गया है। 15 साल पहले 2009 में धनंजय सिंह ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज करने में कामयाब हुए थे।
बाद में उनके बगावती तेवर के चलते बसपा ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद से धनंजय या उनकी पत्नी कोई भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाए। लंबे समय बाद एक बार फिर बसपा का साथ मिलने पर इनकी पत्नी श्रीकला चुनावी रण में हैं।
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जौनपुर संसदीय सीट पर भाजपा ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह व सपा ने बाबू सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। श्रीकला के आने से मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है।
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विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन
धनंजय सिंह ने सबसे पहले रारी विधानसभा सीट से 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने सपा के श्रीराम यादव को 12,789 वोटों से हराया था। इसके बाद उन्होंने जेडीयू के टिकट पर 2007 में सपा के लालजी यादव को 4115 वोटों से हराया। 2009 से पहले बसपा में शामिल हुए और लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की।
रारी की खाली सीट पर धनंजय ने पिता राजदेव सिंह को बसपा से टिकट दिलाया। वे भी चुनाव जीते। नए परिसीमन में रारी विधानसभा बदलकर जब 2012 में मल्हनी बनी तो धनंजय ने अपनी दूसरी पत्नी डॉ. जागृति सिंह को निर्दलीय चुनाव लड़ाया। जागृति यहां पर 50,100 वोट पाई थी जबकि सपा के पारसनाथ यादव ने 81,602 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी।
इसके अलावा धनंजय ने 2017 का विधानसभा चुनाव निषाद पार्टी से लड़ा, जिसमें उनको पारसनाथ यादव से हार का सामना करना पड़ा। 2020 में पारसनाथ के निधन से रिक्त हुई सीट पर हुए चुनाव में धनंजय निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे लेकिन सपा प्रत्याशी लकी यादव ने जीत दर्ज की। इसी तरह जेडीयू के टिकट पर धनंजय सिंह एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरे लेकिन फिर सपा के लकी यादव ने इनको पटखनी दी।
लोकसभा चुनाव
धनंजय सिंह ने रारी से विधायक रहते हुए 2004 का चुनाव जौनपुर लोकसभा सीट से लोजपा के टिकट पर कांग्रेस के समर्थन पर लड़ा था। इस चुनाव में सपा के पारसनाथ यादव जीते थे। धनंजय तीसरे स्थान पर रहे।
बसपा के टिकट पर 2009 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के पारसनाथ यादव को 80 हजार 351 वोट से हराया था। 2014 का लोकसभा चुनाव इन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़ा था, जिसमें उन्हें 60 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे।