अमर उजाला कुछ ऐसे ही मामलों की पड़ताल कर रहा है, ताकि प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को सामने लाने वालों का हौसला न टूटे और आम लोगों को व्यवस्था परिवर्तन का अहसास हो।
डीएलडब्ल्यू से रिटायर्ड प्रदीप कुमार अग्रवाल अपनी जमीन पर अवैध कब्जा कर कराए गए निर्माण को तुड़वाने में तो कामयाब हो गए लेकिन एक साल बाद भी उन्हें कब्जा नहीं मिल पाया है। उन्होंने थाने से लेकर एडीजी तक और लेखपाल से लेकर प्रमुख सचिव राजस्व तक फरियाद लगाई। मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल और एंटी भूमिया पोर्टल पर 50 से ज्यादा शिकायतें अपलोड कीं। ताज्जुब की बात है कि कब्जा मिले बगैर ही इनमें से 46 शिकायतें कागजों पर निस्तारित भी हो गई हैं।
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रोहनिया थाना क्षेत्र के गांव मंडाव स्थित मातापुरम कॉलोनी निवासी अग्रवाल ने 2002 में सदर तहसील के खनावा गांव में जमीन खरीदी थी। बाउंड्रीवाल कराकर कुछ कमरे भी बनवा दिए। 2017 में इनके प्लाट से सटी जमीन बक्सर (बिहार) निवासी तेज नारायण सिंह ने खरीदी थी। आरोप है कि तेज नारायण ने 14 अगस्त, 2017 को बाउंड्रीवाल तुड़वा कर पिलर खड़े कर दिए।
मामला थाना दिवस में पहुंचा तो सुलहनामा कराकर जमीन की नाप-जोख कराई गई। लेखपाल ने उस वक्त रिपोर्ट नहीं दी। बाद में पीडि़त को ही गलत ठहरा दिया। इसकी शिकायत पीडि़त ने एसडीएम सदर से की तो तीन नवंबर, 2017 को पुन: जमीन की नापी कराई गई। इस बार राजस्व निरीक्षक ने अग्रवाल की जमीन को सही ठहराया। उन्होंने थानाध्यक्ष रोहनिया को जमीन पर कब्जा दिलवाने के लिए पत्र भी लिखा।