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यूपी: जनसुनवाई पोर्टल पर फर्जीवाड़ा, ये मामला जानकार तो आप अपना सिर पीट लेंगे!

Fri, 14 Sep 2018 02:22 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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जनसुनवाई पोर्टल
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विकास कार्यों से लेकर बुनियादी समस्याओं के समयबद्ध और समुचित समाधान के लिए बनाए गए जनसुनवाई पोर्टल अफसरों की आंकड़ेबाजी के कारण मजाक बन गए हैं। सरकार की मंशा थी कि पोर्टल के जरिए लोगों की भागदौड़ बचेगी और उन्हें अपने घर और क्षेत्र में ही अपनी शिकायतों का निदान मिल जाएगा पर कमोवेश हर विभाग जनसरोकार से जुड़ी शिकायतों को लेकर उदासीन है।
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अमर उजाला कुछ ऐसे ही मामलों की पड़ताल कर रहा है, ताकि प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को सामने लाने वालों का हौसला न टूटे और आम लोगों को व्यवस्था परिवर्तन का अहसास हो।
 


डीएलडब्ल्यू से रिटायर्ड प्रदीप कुमार अग्रवाल अपनी जमीन पर अवैध कब्जा कर कराए गए निर्माण को तुड़वाने में तो कामयाब हो गए लेकिन एक साल बाद भी उन्हें कब्जा नहीं मिल पाया है। उन्होंने थाने से लेकर एडीजी तक और लेखपाल से लेकर प्रमुख सचिव राजस्व तक फरियाद लगाई। मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल और एंटी भूमिया पोर्टल पर 50 से ज्यादा शिकायतें अपलोड कीं। ताज्जुब की बात है कि कब्जा मिले बगैर ही इनमें से 46 शिकायतें कागजों पर निस्तारित भी हो गई हैं।
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पढें: नौकरशाह करा रहे सरकार की किरकिरी, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतों का हो रहा फर्जी निस्तारण

रोहनिया थाना क्षेत्र के गांव मंडाव स्थित मातापुरम कॉलोनी निवासी अग्रवाल ने 2002 में सदर तहसील के खनावा गांव में जमीन खरीदी थी। बाउंड्रीवाल कराकर कुछ कमरे भी बनवा दिए। 2017 में इनके प्लाट से सटी जमीन बक्सर (बिहार) निवासी तेज नारायण सिंह ने खरीदी थी। आरोप है कि तेज नारायण ने 14 अगस्त, 2017 को बाउंड्रीवाल तुड़वा कर पिलर खड़े कर दिए।

मामला थाना दिवस में पहुंचा तो सुलहनामा कराकर जमीन की नाप-जोख कराई गई। लेखपाल ने उस वक्त रिपोर्ट नहीं दी। बाद में पीडि़त को ही गलत ठहरा दिया। इसकी शिकायत पीडि़त ने एसडीएम सदर से की तो तीन नवंबर, 2017 को पुन: जमीन की नापी कराई गई। इस बार राजस्व निरीक्षक ने अग्रवाल की जमीन को सही ठहराया। उन्होंने थानाध्यक्ष रोहनिया को जमीन पर कब्जा दिलवाने के लिए पत्र भी लिखा।
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नौकरशाह करा रहे सरकार की किरकिरी

- फोटो : amar ujala
मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर अग्रवाल नायब तहसीलदार से मिले। 23 जनवरी, 2018 को फिर जमीन की नापी कराई गई। इस बार नायब तहसीलदार ने सीओ सदर अंकिता सिंह को पत्र भेजकर कब्जा दिलाने को कहा लेकिन यहां से भी लाभ नहीं मिला। छह फरवरी को प्रदीप अग्रवाल संपूर्ण समाधान दिवस में तत्कालीन कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण से मिले। उन्होंने भी जमीन पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया। इसका भी पालन नहीं हुआ। 20 फरवरी को वह तत्कालीन डीएम योगेश्वर राम मिश्र से मिले। डीएम के निर्देश पर आठ मार्च को एसडीएम सदर, नायब तहसीलदार, कानूनगो और पुलिस की मौजूदगी में कब्जा हटा दिया गया। 

इसके बाद अग्रवाल ने अपनी बाउंड्रीवाल बनानी चाही तो पुलिस की मदद से काम रुकवा दिया गया। तब से अग्रवाल जमीन पर कब्जे के लिए एसएसपी, एसडीएम, कमिश्नर, सचिव, मुख्य सचिव को 72 बार दरख्वास्त दे चुके हैं। 240 दिन उन्होंने एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के यहां फरियाद लगाई। 50 से ज्यादा बार सीएम जनसुनवाई और एंटी भूमाफिया पोर्टल पर शिकायतें अपलोड कीं।

इनमें 46 बार शिकायत निस्तारित दिखाकर फाइल क्लोज कर दी गई। निस्तारण में कभी इन्हें झूठा ठहराया गया तो कभी आरोप ही निराधार बताए गए। हर बार पोर्टल से निस्तारण संबंधी आख्या भी अलग-अलग बताई गई।

एसपी ग्रामीण अमित कुमार ने कहा कि  जमीन संबंधी मामले में पुलिस को कोई अधिकार नहीं है। शिकायतकर्ता सीओ सदर, मुझसे या एसएसपी से मिलकर समस्या बताएं। पुलिस के स्तर से कोई गड़बड़ी हुई है तो उसे सही कराया जाएगा। 
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