मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अधिक कीमत पर सौर ऊर्जा की खरीद की अनिवार्यता खत्म करने की अपील को केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि हर हाल में उत्तर प्रदेश को सौर ऊर्जा से बनाई जाने वाली बिजली लेनी होगी क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी हर किसी की है। मीरापुर बसहीं के विद्यालय में शनिवार को रक्षाबंधन सुरक्षा कवच योजना समारोह में भाग लेने आए राज्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा महंगी ही होगी, यह गुजरे जमाने की बात हो गई। प्रदेश सरकार खुली बोली लगाकर जहां से चाहे सस्ती सौर बिजली खरीद सकती है। उन्होंने कहा कि बनारस में इंटीग्रेटेड विद्युत सुधार परियोजना पर से काम तेजी से चल रहा है और जैसे ही मौसम अच्छा होगा इसको लांच करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस आएंगे।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने कोटे की कुल बिजली का 35 फीसदी सौर ऊर्जा से लेना अनिवार्य करके मुश्किल खड़ी कर दी है। सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली की लागत पांच से छह रुपये तक है जबकि प्रदेश सरकार कई उत्पादन इकाइयों से तीन से चार रुपये की दर से बिजली खरीद रही है। सौर बिजली की अनिवार्य खरीद से बिजली की दरें बढ़ेंगी। ऐसे में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर
इस शर्त को खत्म करने की अपील की है। ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार को नियमों के तहत सौर ऊर्जा की खरीद करनी ही होगी। उन्होेंने कहा कि खुली बोली लगाकर प्रदेश सरकार कम कीमत पर सोलर एनर्जी ले सकती है। मध्यप्रदेश और तेलंगाना खुली नीलामी के जरिए सस्ती सौर ऊर्जा खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण की चिंता भी तो जरूरी है।
बनारस में विद्युत आपूर्ति की बदहाली राज्य का विषय है। केंद्र सरकार इसमें सहायता भर कर सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार में 22 हजार गांवों में बिजली पहुंचानी थी लेकिन तीन हजार गांवों में ही पहुंच पाई। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की महज देश भर में 18500 गांवों के विद्युतीकरण की शेष रहने की बात पर उर्जा मंत्री ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि उनका मतलब बिहार में सघन विद्युतीकरण था, लेकिन यह हकीकत है कि वहां ढाई हजार गांवों में अभी बिजली नहीं पहुंची है।