इसके बाद वह सामाजिक सरोकारों से जुड़ गए थे। जून 2004 में वह छात्रों की समस्या लेकर कलेक्ट्रेट गए थे। इसे लेकर कलेक्ट्रेट के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लालजी की तहरीर के आधार पर राजकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। शैलेंद्र इस मुकदमे में जेल में भी रहे। वर्तमान प्रदेश सरकार का मानना है कि शैलेंद्र के खिलाफ यह मुकदमा मुख्तार के खिलाफ की गई कार्रवाई के कारण दर्ज कराया गया था।
सीजेएम की अदालत ने प्रदेश सरकार के अनुरोध पर शैलेंद्र के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। उधर, मुकदमा वापसी की अदालत की नकल मिलने पर बेगुनाह शैलेंद्र का दर्द छलक पड़ा। फेसबुक पर उन्होंने लिखा कि वह और उनका परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस सहृदयता का आजीवन आभारी रहेगा। इसके साथ ही संघर्ष के दौरान साथ देने वाले सभी शुभेच्छुओं का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।