बलिया नगर विधानसभा पर फिलहाल भाजपा और सपा के हैवीवेट प्रत्याशियों के बीच सीधी लड़ाई नजर आ रही है। बसपा जहां इस लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रही है। वहीं, भाजपा का एक बागी पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा ने यहां से प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह पर दांव लगाया है।
भाजपा के मतों में सेंध लगाने के लिए जितेंद्र तिवारी वीआईपी से मैदान में हैं। उनके सामने सपा से पूर्व मंत्री नारद राय हैं। बसपा के व्यापारी शिवदास प्रसाद उर्फ मदन वर्मा लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस ने यहां से ब्राह्मण प्रत्याशी ओम प्रकाश तिवारी को उतार कर भाजपा की परेशानी बढ़ाई है।
बैरिया विधानसभा सीट पर इस बार पूरे प्रदेश की नजरें गड़ी हुई हैं। फायर ब्रांड नेता एवं अपनी अलग पहचान रखने वाले विधायक सुरेंद्र सिंह टिकट कटने पर भाजपा से बगावत कर वीआईपी से मैदान में हैं। बीजेपी ने यहां के चुनाव को अपनी नाक का सवाल बनाते हुए राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल को मैदान में उतार दिया है।
सपा ने पर्व विधायक जयप्रकाश अंचल को प्रत्याशी बनाया तो टिकट मांग रहे सुभाष यादव बगावत पर उतर आए। फिर से बसपा का दामन थामा और घोषित टिकट का बदलवा बसपा से प्रत्याशी भी बन गए। ऐसे में भाजपा और सपा दोनों ही बगावत से दो-चार हैं।
बलिया में मतदान के लिए लगी कतार
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तीन जिलों के सीमा पर स्थित बेल्थरारोड जनपद की एक मात्र सुरक्षित विधानसभा है। भाजपा ने अपने सिटिंग विधायक धनंजय कन्नौजिया का टिकट काटकर बसपा से आए छट्ठू राम पर भरोसा जताया है। सपा से गठबंधन में मिली इस सीट से सुभासपा ने गोरखपुर के हंसू राम तो बसपा ने प्रवीण प्रकाश को प्रत्याशी बनाया है। इनके बीच कांटे की लड़ाई है। यह सीट अग्नि परीक्षा से कम नहीं है।
फेफना विधानसभा सीट से इस बार राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार उपेंद्र तिवारी हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में है। सुभासपा के साथ मैदान में उतरी सपा इस बार उपेंद्र तिवारी की अच्छी घेराबंदी की है। यादव बहुल सीट पर बसपा ने केडी यादव को प्रत्याशी बनाया है। सपा के संग्राम सिंह यादव परंपरागत वोटों के सहारे जीत के प्रति आश्वस्त हैं। कांग्रेस से ब्राह्मण प्रत्याशी भी मैदान में है।
बांसडीह विधानसभा से जीत का चौका लगाने के लिए राम गोविंद चौधरी पांचवीं बार चुनाव मैदान में हैं। सुभासपा छ़ोड़कर बसपा से मानती राजभर मैदान में उतरीं है। वहीं केतकी सिंह भाजपा और निषाद पार्टी के गठबंधन से मैदान में हैं। उन्हें अपने निर्दलीय मतों के साथ भाजपा के कोर वोट, मल्लाह वोट और तीन बार से विधायक के विरोध स्वर की आस है। उनके लिए भी भाजपा छोड़ वीआईपी से मैदान में आए कनक पांडेय और कांग्रेस से ब्राह्मण प्रत्याशी पुनीत पाठक परेशानी बढ़ाएंगे।
वर्ष 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में रसड़ा सीट से बसपा के उमाशंकर सिंह विधायक बन रहे हैं। सपा ने ये सीट सुभाषपा को गठबंधन में दी है। सुभासपा से पहले भाजपा ने यहां से बब्बन राजभर को प्रत्याशी बना उसका खेल बिगाड़ दिया। सुभासपा ने महेंद्र चौहान को प्रत्याशी बनाया है। दोनों ही दल बसपा को घेरने में जुटे हैं। कांग्रेस से महिला ओम लता प्रत्याशी हैं।
बलिया में मतदान के लिए जाती महिलाएं
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सिकंदरपुर विधानसभा सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। फिलहाल भाजपा के संजय यादव यहां से विधायक और वर्तमान में प्रत्याशी हैं । 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी को 23 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था।
इससे पहले यहां से सपा और बसपा के उम्मीदवार जीतते आ रहे थे। 2012 में सपा के जियाउद्दीन रिजवी, 2007 में बसपा के भगवान पाठक, 2002 में सपा के जियाउद्दीन रिजवी ने चुनाव जीता था। पिछली बार यहां कमल खिला, अब देखना दिलचस्प होगा कि 2022 में बीजेपी अपनी यह सीट बचाकर रख पाती है या वापस सपा-बसपा का कब्जा होगा।