वाराणसी। उदय प्रताप कॉलेज में शुक्रवार को पहली बार पीएचडी में प्रवेश पाए 93 छात्र और छात्राओं का इंडक्शन प्रोग्राम में स्वागत हुआ। इन्हें बीएचयू के लैब से भी मदद मिलने का आश्वासन दिया गया है। कॉलेज के शोध अनुभाग ने इसमें देश भर के विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों को बुलाया।
जय प्रकाश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि इन नवप्रवेशी शोध छात्र-छात्राओं की पहली पीढ़ी पर शोध कार्यक्रम को अच्छी तरह संचालित करने की बड़ी जिम्मेदारी है। इनको पूरे मनोयोग से शोध कार्य में लगना चाहिए। वास्तव में शोध एक हाइपोथिसिस से शुरू होकर समाधान पर समाप्त होता है। बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. समरेंद्र कुमार सिंह ने कॉलेज में शोध कार्य के क्षेत्र में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। कहा कि वास्तव में शोध मशीन नहीं करती, बल्कि शोध आइडिया का होता है। वहीं शोध से मिला ज्ञान सिर्फ प्रसिद्धि के लिए नहीं होना चाहिए। बल्कि यह अपने आप में एक आवश्यक काम है। बीएचयू के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो.रंजन कुमार सिंह ने कहा कि शोधार्थी होना जीवन का सबसे सुनहरा अवसर है। शोध कार्य के दौरान नई-नई चीज पढ़ने और समझने का अवसर मिलता है। समस्याएं भी आती हैं लेकिन उनके समाधान भी धैर्य के साथ मिलते हैं।
शोध की गुणवत्ता के साथ कोई भी समझौता नहीं
प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि महाविद्यालय को अपने ढंग से शोध कार्यक्रम चलाने की अनुमति प्राप्त हुई है। शोध कार्य के दौरान जिस भी सुविधा की जरूरत होगी वो दी जाएगी। शोध की गुणवत्ता के साथ कोई भी समझौता नहीं होगा। इसलिए सभी शोध छात्र पूरी ईमानदारी और मौलिकता के साथ कार्य करें। इस इंडक्शन प्रोग्राम में भौतिकी विभाग के अध्यक्ष और यूजीसी सेल के प्रभारी प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने नवागत शोध छात्राओं को शोध के तकनीकी पक्ष से अवगत कराया। इस दौरान पूरे कॉलेज के प्रोफेसर मौजूद रहे।