प्राचार्य प्रो. सिंह ने कहा कि हत्या के समय सीसीटीवी फुटेज और फोन का सीडीआर सबकुछ जांच के लिए उपलब्ध है। पुलिस के पास सारे साक्ष्य हैं, जिन्हें देखकर सच्चाई का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी खंडन किया कि घटना के समय प्राचार्य ने सामने खड़े होकर फोन से दोनों को कार्यालय बुलाया था।
उन्होंने बताया कि 17 मार्च को एक विवाद हुआ था, जिसमें सूर्या सहित दो छात्रों पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उस समय वह अयोध्या दर्शन पूजन के लिए गए हुए थे, इसलिए सूर्या से बातचीत नहीं हो पाई, लेकिन शिवपुर पुलिस को शिकायत भेजी गई थी। दो दिन बाद, 20 मार्च को रूटीन कार्य के दौरान सूर्य को गोली मारी गई।
घटना का क्रम
प्राचार्य ने अपने आवास पर आरोपी मंजीत का पीछा करने वाले प्रोफेसरों और अस्पताल तक ले जाने वाली टीम के साथ प्रॉक्टोरियल बोर्ड को बुलाकर पूरी घटना सिलसिलेवार बताई। सूर्या 20 मार्च को 25 नंबर के पेपर के लिए मिड टर्म बैक परीक्षा फॉर्म भरने आया। उसने 10:15 बजे फॉर्म की जानकारी ली और 500 रुपये देकर फॉर्म खरीदा। लौटते समय 10:30 बजे उसकी मुलाकात डिप्टी कंट्रोलर डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह से हुई, जो प्रक्रिया समझा रहे थे।
17 मार्च की घटना को लेकर हॉस्टल के कई छात्र सूर्या की पैरोकारी के लिए भी आए थे। तमाम बातचीत के बाद सूर्या 10:50 बजे तक बाहर चला गया, जिसका वीडियो रिकॉर्ड मौजूद है। लेकिन 11:10 बजे कला संकाय के कक्ष संख्या 12 के बाहर सूर्या पर गोली चली। प्राचार्य ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर बयान देने वालों की भी जांच की जानी चाहिए।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने किया मंजीत का पीछा
प्रॉक्टोरियल बोर्ड के प्रो. मनोज कुमार सिंह, चंद्रशेखर और विजय सिंह ने मंजीत का पीछा किया। वह छत तक चढ़ गया। उनके पास सुरक्षा के संसाधन या हथियार नहीं थे। गोली लगने पर उनकी भी जान जा सकती थी। मंजीत बाद में कूदकर भाग गया और कैंपस से बाहर निकल गया। किसी शिक्षक ने उसे नहीं बुलाया... अगर किसी के पास रिकॉर्ड है तो वह दिखा सकता है।