इसके अलावा रामनगर पालिका और सूजाबाद पंचायत की आबादी 70 हजार है। कुल मिलाकर अब 16,36,700 आबादी हो जाएगी। नियमानुसार 15 से 18 लाख की आबादी पर 100 वार्ड बनाने का प्राविधान है। ऐसी स्थिति में वाराणसी नगर निगम में भी 100 वार्ड बनेंगे। सबसे अधिक दिक्कत इनकी देखरेख में आएगी, क्योंकि अब दायरा ढाई गुना बढ़ गया है।
ऐसी स्थिति में गंगा पार रामनगर में एक जोन बनाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाले इस नगर निगम के विस्तार के पीछे इसे 15 लाख आबादी से अधिक का बनाना है ताकि प्रदेश की लखनऊ, कानपुर सहित उन बड़े नगर निगम में शामिल किया जा सके, जहां पार्षदों की संख्या 110 है। इससे यहां बजट बढ़ेगा, विकास की रफ्तार तेज होगी। आमजन को सुविधाओं को बढ़ाने में नगर निगम खुद सक्षम होगा।
नगर निगम में विलय करने के बाद तो नगरीय क्षेत्र का विकास हो ना हो, लेकिन नगरवासियों की मुश्किलें जरूर बढ़ सकती हैं। कारण यह है कि अभी तक लोग जल मूल्य ही देते थे। नगर निगम बनने के बाद रामनगर और सूजाबाद की जनता को गृह कर, सीवर कर के साथ ही कूड़ा उठान तक के लिए रुपये अदा करने पड़ेंगे।
कल तक नगर पंचायत, आज नगर निगम का हिस्सा
सूजाबाद व डोमरी गांव को जोड़कर नगर पंचायत का दर्जा दिया गया था। अभी नवसृजित पंचायत के विकास सहित अफसरों व कर्मचारी के कार्यालय को बनाने की तैयारी चल ही रही है। इसी बीच अब पंचायत को नगर निगम में विलय की तैयारी शुरू कर दी गई है।
रामनगर किला, रामनगर की रामलीला विश्व प्रसिद्ध, महिला डिग्री कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय संप्रेक्षण गृह (बालिका), राजकीय बाल गृह बालक व बालिका, पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का निवास स्थान, 150 बेड का राजकीय अस्पताल, डेढ़ दर्जन रामलीला स्थल, 36वीं वाहनी पीएसी मुख्यालय, विधि विज्ञान प्रयोगशाला, 11 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय अब नगर निगम में शामिल हो जाएंगे।
गंगापार में विकास की कई योजनाएं लेंगी विस्तार
सरकार की ओर से गंगापार में कई विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इसमें रिवर फ्रंट के विकास के तहत 26 सौ करोड़ का प्रस्ताव है। साथ ही टेंट सिटी, आवासीय योजना, सिक्सलेन, गंगा पर पुल निर्माण है। इन परियोजनाओं की स्वीकृति को लेकर नगर पालिका व पंचायतों की सहमति लेनी पड़ती है। लिहाजा, सरकार परियोजनाओं की गति बढ़ाने के लिए नगर निगम का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है।