जेपी आंदोलन के बाद वर्ष 1991 में श्रीराम लहर उठी थी। आसपास की सभी सीटों पर इस लहर का व्यापक प्रभाव दिखा। भाजपा प्रत्याशियों को जीत मिली, लेकिन रारी में जीत जनता पार्टी के मिर्जा सुल्तान को हासिल हुई।
उन्हें 28659 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के अरुण सिंह 19851 मत प्राप्त कर पाए थे। भाजपा के माता सेवक उपाध्याय 19526 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। 1993 में भी श्रीराम लहर का प्रवाह प्रचंड था। तब भी यहां बसपा के लालजी यादव 58680 वोट पाकर विजेता बने।
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के माता सेवक उपाध्याय (29670) को लगभग दोगुने अंतर से हराया था। वर्ष 2002 में जब सूबे में सपा के पक्ष में माहौल था, तब निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह निर्वाचित हुए और वर्ष 2007 के चुनाव में बसपा को पूर्ण बहुमत मिलने के दौरान भी रारी की सीट जदयू के खाते में आ गई थी। वर्ष 2017 के प्रवाहित प्रचंड मोदी-योगी लहर में मल्हनी के वोटरों ने सपा पर भरोसा जताया था।