बीते 24 मार्च को वाराणसी नगर निगम के मिनी सदन की बैठक में हुआ हंगामा अभी तक शांत नहीं हुआ है। मामले में विपक्षी पार्षदों पर मुकदमा दर्ज कराया गया जिसको लेकर विरोध जारी है। रविवार को वाराणसी नगर निगम के गेट पर संयुक्त विपक्ष ने पार्षदों पर हुए मुकदमे के विरोध में धरना दिया।
इसमें सभी पार्टियों के वक्ताओं ने महापौर के साथ ही प्रदेश और केन्द्र सरकार को कोसा। अविलंब अगर पार्षदों पर लगाए गए मुकदमे वापस नहीं लिए गए और कार्यकारिणी का चुनाव नहीं किया गया तो हम आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल और सीपीआईएम के निर्दलीय पार्षदों ने इस घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की गई। डीएम को संबोधित मांगों का ज्ञापन एसीएम तृतीय मनोज कुमार को सौंपा।
चंदौली के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि को सदन में अपनी बात पक्ष में या विपक्ष में कहने का अधिकार होता है। वाराणसी की मेयर ने सदन में नियमों का पालन नहीं किया है।
पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि भाजपा नगर निगम में अल्पमत में है इसलिए एक सुनियोजित साजिश सदन को स्थगित किया गया है। मनोज राय धूपचंडी ने कहा कि सदन के अंदर भाजपा के पूर्व सभासदों ने असलहे के साथ विपक्षी पार्षदों से धक्कामुक्की एवं मारपीट की।
उनपर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए। सपा के जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव ने कहा भाजपा के इशारे पर कार्य कर रहे जिला प्रशासन ने पार्षदों के साथ अपराधियों जैसा सलूक किया है।
नगर निगम के बाहर हो रहे धरना-प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन काफी सचेत रहा। इसमें सुबह से ही कई थानों की पुलिस, महिला पुलिस और मजिस्ट्रेट तैनात रहे। इसके अलावा किसी प्रकार की अनहोनी न हो इसलिए फायर ब्रिगेड भी तैनात की गई थी।