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बनारस में बसा छोटा सा ब्राजील: जहां रहते हैं तीन से 19 साल की उम्र के 300 फुटबाल खिलाड़ी, लड़कियां ज्यादा

Sat, 17 Aug 2024 09:15 AM IST
प्रगति चंद उपमिता वाजपेयी, वाराणसी।

सार

काशी का अनोखा गांव है पहाड़ी। इस गांव में 1500 परिवारों में 300 फुटबाल खिलाड़ी हैं। जहां 12 साल पहले बच्चे जुआ खेलते थे वहां अब हर शाम जब वे ग्राउंड पर खेलने के लिए निकलते हैं, तो रौनक किसी खेल गांव जैसी लगती है।
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फुटबाल खेलते वाराणसी के पहाड़ी गांव के बच्चे। - फोटो : रोहित सोनकर
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विस्तार
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बनारस में एक छोटा-सा ब्राजील बसा है। गांव का नाम है पहाड़ी। और यहां रहने वाले 1500 परिवारों के 300 बच्चे फुटबाल खेलते हैं। खूबसूरत बात यह है कि इनमें लड़कों से ज्यादा लड़कियां हैं। बार-बार सिलवाए हुए जूते पहनकर हर शाम जब वे ग्राउंड के लिए निकलती हैं, तो रौनक किसी खेल गांव जैसी लगती है।

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इस गांव के बच्चे 12 वर्ष पहले तक जुआ खेलते थे। इधर-उधर भटकते थे। तभी पास की कॉलोनी में रहने वाले फुटबाल खिलाड़ी भैरव दत्त इन बच्चों के लिए 3-4 फुटबाल ले आए। मैदान के झाड़-झंखाड़ और गड्ढे ठीक करवाकर फुटबाल खेलने लायक बना लिया। फिर गोल पोस्ट के नाम पर एक तरफ बांस के पोल लगाए और दूसरी तरफ कुर्सी रख दी। 

खेल मैदान में पहाड़ी गांव के बेटियां - फोटो : रोहित सोनकर
शुरुआत में सिर्फ सात-आठ बच्चे आते थे। उनके लिए कोच भैरव ने किस्तों में किट मंगवाई। यहां-वहां से जूतों के पैसे जुटाए। तीन नेशनल खेल चुकी सृष्टि कहती हैं कि उन्हें पहली किट भैरव सर ने ही दिलवाई थी। वह दूसरों को देखने मैदान पर जाती थी और सोचती थी कि खेल पाऊंगी या नहीं।  फुटबाल की इस पीढ़ी को तैयार करते हुए कोच भैरव को 40 साल हो चुके हैं। इस मैदान पर पांच साल की, जो बच्ची खेलने आती थी, अब वह 17 साल की है। 

वाराणसी के पहाड़ी गांव में कोच भैरव के साथ फुटबाल खिलाड़ी - फोटो : रोहित सोनकर
पिथौरागढ़ के भैरव सर वैसे तो वरेका में नौकरी करने काशी आए थे। अब उनके सिखाए बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। यही नहीं, अपने खेल के बूते खेल कोटे से नौकरी कर रहे हैं और स्कॉलरशिप पर पढ़ाई भी। एमफिल, बीएड और पीएचडी तक। फिलहाल सात लड़कियां बीएचयू और दो गुवाहाटी से रिसर्च कर रही हैं। तीन प्रोफेसर बन गई हैं। सात पंजाब में स्कॉलरशिप पर पढ़ रही हैं। स्कॉलरशिप की एक शर्त है। पढ़ाई के बदले इन सभी को पदक जीतने होते हैं। कुछ बेटियां ओडिशा व पश्चिम बंगाल के फुटबाल क्लब का हिस्सा हैं।
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75 लड़कियां नेशनल खेल चुकी हैं। इनमें लखपति के परिवार के आठ बच्चे हैं। गांव के लोग इस परिवार को लखपति बुलाते हैं, लेकिन गांव में सबसे टूटा-फूटा घर इनका ही है। हां, उनके हिस्से इस गांव के सबसे ज्यादा मेडल जरूर हैं। पार्वती के परिवार में छह बहनें हैं। तीन बहनें फुटबॉलर हैं और दो नेशनल खेल चुकी हैं। जिस ग्राउंड पर इन बच्चों ने सबसे पहले खेलना शुरू किया, वहां अब इमारत बन गई है। जिस गांव में 300 खिलाड़ी हैं, वहां अब मैदान नहीं। खेलने के लिए अब डेढ़ किलोमीटर दूर बरेका जाना होता है।
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