प्रदेश शासन ने चार पीढ़ी पुराने पेड़ों को विरासत में शामिल किए जाने का निर्देश दिया है। इसके तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे पेड़ों को चुना जाएगा जो कि ऐतिहासिक घटना के गवाह बने हों और आस्थाओं से जुड़े हों। जिसका चयन ग्राम स्तर पर प्रधान, ग्राम पंचायत, खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, शहर स्तर पर नगर आयुक्त द्वारा कराया जाएगा।
पेड़ों में देवताओं के वास की मान्यता के आधार पर इन्हें संरक्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस तरह की पहल शुरू की है। विरासत वृक्ष के देखभाल और सुरक्षित रखने का जिम्मा प्रत्येक जिले के प्रभागीय वनाधिकारी का होगा। विरासत वृक्षों को तब तक काटा या हटाया नहीं जाएगा जब तक वह प्राकृतिक सूख या गिर न जाए।