सीए मनीष सिंह बताते हैं कि महंगाई और खर्चों के बीच जूझ रहे मध्यम वर्ग को इस बजट से राहत मिलने की आस है। सरकार आम आदमी की आय और क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स स्लैब या जीएसटी में कुछ रियायतें दे सकती है। इससे बाजार में मांग बढ़ेगी। हालांकि, विकास कार्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च के लिए राजस्व जुटाने के उद्देश्य से उच्च वर्ग के व्यापारियों पर टैक्स का दबाव थोड़ा बढ़ाया जा सकता है।
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आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी के मुताबिक, ट्रंप टैरिफ और ईयू ट्रेड समझौतों के मद्देनजर, भारतीय उद्योगों के लिए यह बजट महत्वपूर्ण है। पूर्वांचल के टेक्सटाइल और लेदर जैसे उद्योग, जो पिछले कुछ समय से अवसाद या मंदी के दौर से गुजर रहे थे, उन्हें प्रोत्साहन राशि या विशेष पैकेज मिलने की संभावना है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए नई और सरल नियमावली बनने की उम्मीद है। इससे नए उद्यमियों के लिए उद्योग लगाना आसान होगा और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। इसके अलावा, स्टार्टअप्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए भी बजट आवंटित किया जाएगा। पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा के मुताबिक, इस बार के बजट में निर्यात और आयात के लिए नई रूपरेखा तैयार होगी। ट्रंप टैरिफ के बाद ठंडे पड़े उद्योगों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। ईयू ट्रेड इसको सबसे अच्छा उदाहरण है।
यह बजट एक आशावादी दृष्टिकोण के साथ पेश किया जाएगा, जिसका लक्ष्य हर सेक्टर में रोजगार का उदय और देश का सर्वांगीण विकास होगा। वाराणसी सहित पूरे देश में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए नई घोषणाएं संभव हैं। इसमें नई ट्रेनें, बस सेवाएं और नई एयरलाइंस शुरू करने की योजनाएं शामिल हो सकती हैं। साथ ही, बजट में सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाते हुए समाज के वंचित वर्गों के लिए नई कल्याणकारी योजनाओं का एलान हो सकता है। - प्रो. अनूप मिश्रा, अर्थशास्त्री, डीएवी पीजी कॉलेज