परिसर के निरीक्षण के दौरान राजदूत शर्मा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों को ग्रीन नर्सरी क्षेत्र में एक आधुनिक मेडिटेशन सेंटर (ध्यान केंद्र) विकसित करने की सलाह दी, जिससे वैश्विक पर्यटकों को शांतिपूर्ण अनुभव मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने भगवान बुद्ध के चक्रमण स्थल पर स्पष्ट पदचिह्न बनाने का निर्देश दिया ताकि श्रद्धालु उनके बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित हों। निरीक्षण के दौरान जब वे लगभग ढाई हजार वर्ष पुरानी प्राचीन जल निकासी (ड्रेनेज) प्रणाली के पास पहुंचे, तो यह जानकर हैरान रह गए कि वह व्यवस्था आज भी काम कर रही है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अभियांत्रिकी के महत्व को देखते हुए तुरंत वहां विवरण बोर्ड (सूचना पट्ट) लगाने के निर्देश दिए।
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सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने पर व्यापारियों में हर्ष
सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की खुशी में स्थानीय संस्थाओं ने राजदूत विशाल वी. शर्मा का नागरिक अभिनंदन किया। राष्ट्रीय फेरी पटरी ठेला व्यवसाई महासंघ के प्रतिनिधियों ने उन्हें लकड़ी का बना अशोक स्तंभ और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। वहीं सारनाथ टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उन्हें भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए आभार व्यक्त किया।