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उमराव जान की कब्र को बरसी से एक दिन पहले मिली पहचान

Tue, 26 Dec 2017 02:18 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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दरगाहे फातमान में बनकर तैयार हुई उमराव जान की कब्र - फोटो : अमर उजाला
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गुमनामी में डूबी उमराव जान की कब्र को उनकी बरसी से ठीक एक दिन पहले पहचान मिल गई। वाराणसी के सिगरा के फातमान कब्रिस्तान में 80 साल बाद सोमवार को उनकी कब्र पर चुनार के बेशकीमती लाल पत्थरों से मकबरा बनकर तैयार हो गया।
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संयोग है कि कब्रिस्तान में एक तरफ जहां शहनाई के सम्राट भारतरत्न बिस्मिल्लाह खां आराम फरमां हैं तो वहीं दूसरी तरफ अपनी अदाओं और आवाज की खनक से लोगों के दिलों पर राज करने वाली उमराव जान अदा। दोनों के मकबरे भी एक ही शिल्पकार ने गढ़े हैं।

शिल्पी अरुण सिंह ने बताया कि फातमान कब्रिस्तान में छह गुणा10 फीट में बने मकबरे में अष्टकोणीय चार खंभे पर पत्थर से बनी छतरी बहुत खूबसूरत है। इस्लामिक रिवाज के अनुसार उमराव जान की कब्र ऊपर से खुली रखी गई है।
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उमराव जान की कब्र होने के पुरातात्विक महत्व के पत्थर को मकबरे के पश्चिम तरफ स्थापित किया गया है तो दक्षिण तरफ उमराव बेगम लखनवी का नया पत्थर लगा है। 
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सेल्युलाइड पर देखा सभी ने तमाशा

श्रद्धांजलि - फोटो : demo pic
मकबरा बनाने में करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया। इसे बनाने में करीब छह महीने लग गए। इससे पहले वह स्थापत्य कला की जुगलबंदी दिखाने वाला उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का मकबरा और बनारसी संस्कृति को अपने में समेटे नंदी स्तंभ बना चुके हैं।

वह अपने खर्चे से मकबरा बनाने में जुटे तो 26 दिसंबर को पहली बरसी से पहले तैयार कर लिया। अमीरन से उमराव बनीं फैजाबाद की मासूम लड़की की बेबसी का तमाशा सेल्युलाइड के परदे पर तो सबने देखा। मगर ढलती उम्र के बाद की कहानी शायद ही किसी को पता है।

काशी में इस कहानी के दफन पन्ने उनकी मौजूदगी का एहसास कराते हैं। मुजफ्फर अली और जेपी दत्ता सरीखे फिल्मकारों ने उमराव जान के फनकारी के जादू को स्क्रीन पर साकार किया तो लोगों ने दांतो तले उंगली दबा ली थीं। 
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