बच्चों को अच्छे माहौल में पढ़ाई कराने के लिए दुर्गेश ने अपने विद्यालय के अन्य शिक्षकों के सहयोग से कक्षाओं को बाला पेटिंग कराकर उन्हें सुंदर और आकर्षक बनाया। इसके बाद स्मार्ट टीवी और प्रोजेक्टर लगवाया। बच्चों के लिए विद्यालय में पुस्तकालय की सुविधा है, जहां उन्हें किताबें पढ़ने के साथ अलग-अलग गतिविधियों के जरिए रोचक चीजें सिखाई जाती है।
बच्चों की खेलों में रुचि बढ़ने इसके लिए सप्ताह में तीन दिन खेलकूद कराए जाते हैं। संसाधन और विद्यालय की सूरत बदलने से गांव के लोग भी अपने बच्चों का नामांकन इसी स्कूल में कराने लगे हैं। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी स्कूल में लगवाए गए हैं।
दुर्गेश चौबे ने कहा कि बच्चों को विद्यालय में बेहतर सुविधाएं मिले, इसके लिए अपने वेतन से एक लाख रुपये से अधिक धनराशि खर्च कर विद्यालय की सूरत बदलने का प्रयास किया। यदि जनप्रतिनिधि स्कूल आने वाली सड़क पर होने वाले जलभराव की समस्या को ठीक करा दें तो बच्चों के लिए सुविधा हो जाएगी।
चार्ज लेने के बाद जिस तरह से दुर्गेश ने विद्यालय को संवारने के लिए खुद को समर्पित किया, उससे विद्यालय के अन्य शिक्षक भी प्रेरित हुए। जिसके बाद उन्होंने बच्चों के लिए पुस्तकालय में किताबों तो वहीं खेलकूद के लिए उपकरणों की व्यवस्था की। यहीं नहीं विद्यालय के सभी कर्मचारियों ने मिलकर किचन गार्डन तैयार किया है। किचन गार्डन की सब्जियों से ही मध्याह्न भोजन बनाया जाता है।
कामयाबी की राह पर बढ़ रहे नौनिहाल
प्रधानाध्यापक व शिक्षकों के संयुक्त प्रयास से विद्यालय के बच्चे आज कई तरह की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। चाहे वो खेलकूद हो, सांस्कृतिक प्रतियोगिता हो या फिर शैक्षिक प्रतियोगिता। न्याय पंचायत व ब्लॉक स्तर के खेलों में भी स्थान बना चुके हैं।