बच्चों को पढ़ातीं भावना अग्रवाल
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रक्तदान कर कई लोगों की जिंदगी में उजाला ला चुकीं भावना बताती हैं कि जब इस पाठशाला की शुरुआत की थी तो मेरे पास बहुत कम बच्चे थे। लेकिन आज ये कारवां इतना बढ़ गया है कि घर में बच्चों को बैठाकर पढ़ाने के लिए जगह कम पड़ जाती है। कई बार आर्थिक समस्याओं से जूझते इस तरह के बच्चे अपनी पारिवारिक स्थिति से जीत नहीं पाते और पढ़ाई छोड़कर काम करने लगते हैं। मेरी कोशिश है कि इन बच्चों को शिक्षित कर उनका भविष्य संवार सकूं।