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Varanasi: अहिल्याबाई ने स्त्रीधन से कराया था मंदिरों का जिर्णोद्धार, 9वीं पीढ़ी से आए उदय राजे ने कही ये बात

Thu, 12 Dec 2024 03:00 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी ।

सार

बीएचयू में मालवा की महारानी अहिल्याबाई के राज्याभिषेक का त्रिशताब्दी समारोह मनाया गया। इस दौरान अहिल्याबाई की नौवीं पीढ़ी से आए उदय राजे ने कहा कि लोकमाता ने स्त्रीधन से मंदिरों का जीर्णोंद्धार कराया था। 
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बीएचयू में मना अहिल्याबाई के राज्याभिषेक का त्रिशताब्दी समारोह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू में मालवा की महारानी लोकमाता अहिल्याबाई के राज्याभिषेक का त्रिशताब्दी समारोह मनाया गया। स्वतंत्रता भवन में बुधवार को अहिल्याबाई की नौवीं पीढ़ी के सदस्य इंदौर के उदय सिंह राजे होल्कर अपनी पत्नी के साथ पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पति के साथ सती होने से श्वसुर मल्हार राव होल्कर ने अहिल्याबाई को रोका। घाट, धर्मशाला का निर्माण या मंदिरों का जीर्णोंद्धार लोकमाता ने अपने स्त्रीधन से किया था। वह कुशल प्रशासक के साथ आध्यात्मिक महिला भी थी। उनके हाथ की लिखी श्रीमद्भागवत गीता भोपाल संग्रहालय में संरक्षित है।

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मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मुकुंद ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने लेस गवर्नमेंट मोर गवर्नेंस सदृश सूक्ति चरितार्थ किया। जो राजसत्ता अपनी प्रजा की हर समस्या का समाधान करे उसे पुण्यश्लोक कहा गया है। इस समाज को पुरुषत्व की जितनी आवश्यकता है, उतनी ही मातृत्व की भी। आज अर्थशास्त्री बताते हैं कि राष्ट्र की जीडीपी में महिलाओं का भरपूर योगदान हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक लाख तीस हजार से अधिक सेवा कार्य चल रहे हैं। इनमें महिलाएं आगे हैं। 

विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. माधुरी कानिटकर ने कहा कि लोकमाता की तीन विशिष्ट भूमिकाएं सैनिक, ममतामयी अभिभावक और शिक्षिका की थी। इनसे प्रेरित होकर मैंने अपने जीवन को संवारा। समारोह समिति की अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. चंद्रकला पाडिया ने कहा कि भारतीय नारी उस पक्षी की तरह है जो दिन में तो आकाश में विचरण करती है, लेकिन शाम होते-होते वह अपने नीड़ में वापस आने की इच्छा भी रखती है। इस दौरान बीएचयू के प्रो. रामनारायण द्विवेदी, डॉ. नीरजा माधव और डॉ. कुमकुम आदि मौजूद रहे।

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नाटक में दिखाया विश्वनाथ मंदिर निर्माण

बीएचयू में मना अहिल्याबाई के राज्याभिषेक का त्रिशताब्दी समारोह - फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम के दौरान निवेदिता शिक्षा सदन और संत अतुलानंद के छात्र-छात्राओं ने अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर आधारित लघु नाटिकाओं का मंचन किया। लोकमाता की जीवन चरित की प्रस्तुति दी गई। संत अतुलानंद के बच्चों ने लघु नाटिका से काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना के प्रसंग को दिखाया।
 
महेश्वर से मोक्षदायिनी काशी का लोकार्पण
आरएसएस के ’चेतना प्रवाह’ के लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण किया गया। गुंजन नंदा की पुस्तक देवी अहिल्याबाई : महेश्वर से मोक्षदायिनी काशी तक का भी लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में स्वतंत्रता भवन की वीथिका में प्रदर्शनी भी लगाई गई।

प्रधानमंत्री ने अहिल्याबाई होल्कर के सपनों को किया साकार

बीएचयू में मना अहिल्याबाई के राज्याभिषेक का त्रिशताब्दी समारोह - फोटो : अमर उजाला
महारानी अहिल्याबाई के परिवार के सदस्य उदय सिंह राजे होल्कर ने कहा कि आज पहली बार विश्वनाथ धाम परिसर में मंदिर का विशाल स्वरूप देखकर खुशी हुई। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहिल्याबाई होल्कर के सपनों को साकार किया है। वह बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित अनुष्ठान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में अहिल्याबाई होल्कर के राज्याभिषेक पर्व तिथि पर काशी विश्वनाथ धाम में पूजन हुआ। धाम में स्थापित रानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का षोडशोपचार पूजन किया गया। अहिल्याबाई के परिवार के सदस्य उदयसिंह राजे होल्कर, डाॅ. माधुरी कानिटकर, रविंद्र किरकोले, प्रो. रामनारायण द्विवेदी व नितिन कुमार ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
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काशी विश्वनाथ मंदिर में अहिल्याबाई होल्कर के राज्याभिषेक पर्व तिथि पर हुआ पूजन - फोटो : मंदिर प्रशासन
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने मंदिर प्रबंधन की ओर से सभी को सम्मानित किया। डाॅ. माधुरी कानिटर ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम राष्ट्र का गौरव है। रविंद्र किरकोले ने कहा कि हमारी विरासतों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है। प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर काशीवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि हमारी संस्कृति की रक्षा मातृशक्ति से ही संभव है और इसका उदाहरण हैं अहिल्याबाई होल्कर।
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