अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश राय की अदालत ने श्रमजीवी एक्सप्रेस में विस्फोट मामले में बांग्लादेशी आतंकी हिलालुद्दीन और पश्चिम बंगाल के नफीकुल विश्वास को शुक्रवार को 18 साल बाद दोषी करार दिया। साथ ही दो जनवरी 2024 को सजा सुनाने की तिथि तय कर दी। इसी मामले में दो और आतंकियों पहले फांसी की सजा मिल चुकी है। दोनों जौनपुर जेल में ही बंद हैं।
28 जुलाई 2005 को सिंगरामऊ के हरपालगंज हरिहरपुर के पास श्रमजीवी एक्सप्रेस में बम विस्फोट हुआ था। इसमें 12 लोगों की मौत हुई थी। 62 लोग गंभीर रूप घायल हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने जांच की तो पता चला कि आतंकी घटना है। मामले में मुकदमा दर्ज हुआ और विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। वर्ष 2016 में अपर सत्र न्यायाधीश बुधिराम यादव की अदालत ने बांग्लादेशी आतंकी रोनी उर्फ आलमगीर और षड्यंत्र करने वाले आतंकी ओबैदुर्रहमान को फांसी की सजा सुनाई थी। दोनों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है, जो विचाराधीन है। मामले में नामजद अन्य दोनों आतंकी बांग्लादेश निवासी हिलालुद्दीन और पश्चिम बंगाल के नफीकुल के मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। दोपहर बाद तीन बजे दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला कारागार से दीवानी न्यायालय ले जाया गया। करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया। साथ ही सजा की तिथि तय कर दी।
अपर शासकीय अधिवक्ता फौजदारी वीरेंद्र कुमार मौर्या ने बताया कि मामले में दोनों आरोपी आतंकियों को दोषी करार दिया गया है। सजा दो जनवरी को सुनाई जाएगी। इस मामले में नामजद दो और आतंकियों को पहले ही फांसी की सजा मिल चुकी है।