खुली टंकी से हो रही थी पानी की सप्लाई
स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले अस्पताल में लापरवाही दिखी। यहां खुली टंकी से पानी की सप्लाई की जा रही थी। यही पानी मरीजों के साथ उनके परिजन और स्टाप करता था। कई महीने पहले ही टंकी से ढक्कन हट गया था। इसके बावजूद इसे नहीं ढंका गया। वहीं मरीजों की शिकायत के तीसरे दिन टंकी की सफाई की याद आई। इससे लोग गंभीर बीमारी से ग्रसित हो सकते थे।
पोस्टमार्टम बगैर दफना दिए गए शव
शनिवार को पेयजल टंकी से निकाले गए दोनों शवों को बगैर पोस्टमार्टम कराये जमीन के बंदर दफना दिया गया। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि मृत बंदरों के शव को पोस्टमार्टम के बाद ही दफनाए जाने का प्रावधान है। यदि बगैर पोस्टमार्टम के बंदरों के शवों को दफना दिया वन्य जीव संरक्षण के प्रावधानों के विपरीत है।
डिप्टी सीएमओ करेंगे मामले की जांच : सीएमओ
सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने कहा कि पानी की टंकी में बंदरों के मरे पड़े रहने के मामले की जांच क्षेत्रीय डिप्टी सीएमओ से कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वैसे बंदरों के मरने की जानकारी मिलने के बाद ही पेयजल आपूर्ति को बंद करा दिया गया था। अभी किसी मरीज-परिजन ने पेयजल आपूर्ति से किसी तरह की बीमारी की शिकायत नहीं की है।