शृंगेरी मठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती ने कहा कि सदियों से सनातन धर्म पर आक्रमण हो रहे हैं। शंकराचार्य के प्रयत्न से सनातन हिंदू धर्म जीवित है। शंकराचार्य प्रणीत संन्यासी परंपरा का निर्वहन एवं धर्म जागरण संन्यासियों का मूल कर्तव्य है। वर्तमान दौर सनातन धर्म के लिए संक्रमण काल है, ऐसे में योग्य संन्यासियों की अत्यंत आवश्यकता है। योग्य संन्यासी ही सनातन धर्म के विरुद्ध चल रहे दुष्प्रचार का जवाब दे सकता है।
शनिवार को शृंगेरी मठ महमूरगंज में वेदांत भारती व श्री शंकराचार्य वाग्यसेवा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय विराट संत समागम एवं सौंदर्य लहरी पारायण महोत्सव को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म की संदर्भ सहित व्याख्या कर समाज में व्याप्त भ्रांति को तोड़ा जा सकता है। उपनिषद में प्रतिमा का तात्पर्य मूर्ति नहीं उपमा है। उपनिषद में व्याख्या है कि भगवान के समान कोई नहीं है। सनातन धर्म अनुयायी को धर्म के मूल तत्व को गहनता से समझना चाहिए। यजुर्वेद में उल्लेख है कि पारंपरिक धर्म का अनुसरण सदैव करते रहना चाहिए। पारंपरिक धर्म का परित्याग पाप है। ओंकारेश्वर के पीठाधीश्वर प्रणवानंद स्वामी ने कहा कि सभी मत संप्रदाय के भाष्य व प्रकरण ग्रंथों को सहज भाषा में अनुवाद करना चाहिए। जिससे समाज भाष्य को सुगमता से समझ पाएगा। कोरोना काल के बाद 126 देश में साढ़े तीन लाख लोग गीता का पाठ नियमित रूप से कर रहे हैं।
धर्मांतरण मुख्य सामाजिक समस्या
पंचायती अखाड़ा के स्वामी आत्मानंद ने कहा कि आज समाज में बड़ी भ्रांति है। अनुकूलता ही सुख है। प्रतिकूलता ही दुख है। भौतिकवाद चरम पर है। ऐसे में शंकराचार्य के अद्वैत सिद्धांत की चर्चा व्यापक करने की जरूरत है। दक्षिणामूर्ति पीठाधीश्वर स्वामी पुण्यानंद महाराज ने वर्तमान सामाजिक समस्याओं पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आज धर्मांतरण मुख्य सामाजिक समस्या है। वैदिक सनातन धर्म के समानांतर कोई धर्म नहीं है। वेद का अर्थ ही धर्म है।
महमूरगंज का नाम किया जाए महादेवनगर
आर्ष विद्यापीठ तेलंगाना के स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती ने कहा कि सभी राज्य में योगी की आवश्यकता है। देश की सत्ता योगीजन के हाथों में आएगी तभी देश विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने महमूरगंज का नाम महादेवनगर करने व सभी राज्यों में आदि शंकराचार्य की मूर्ति स्थापना की मांग की। राम जन्मभूमि न्यास के स्वामी गोविंद गिरी महाराज ने कहा कि जिसके द्वारा इंद्रियों का शमन ही ज्ञान है। आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म को सुगम आचरण धर्म बनाया। उन्होंने कहा कि गीता सर्व समावेशी ग्रंथ है।