IMS BHU: इस समस्या को लेकर बीएचयू में सिर्फ कागजों तक ही कार्रवाई सीमित रह गई है। कई चिकित्स आज भी परेशान है। उन्हें यहां अन्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। जरूरत के हिसाब से सीनियर रेजिडेंट भी नहीं मिल पाए हैं। यहां दो बार विज्ञापन जारी होने और साक्षात्कार के बाद भी 60 से अधिक पद खाली पड़े हैं।
आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाएं मिलने के लिए 2018 में ही समझौता हुआ था। कागज पर कार्यवाही भी चल रही है। इसके बाद भी बीएचयू के डॉक्टरों का यहां मन नहीं लग रहा है। पिछले चार साल में एक दो नहीं बल्कि 22 डॉक्टरों ने आईएमएस बीएचयू को छोड़ दिया है। अब वह देश के दूसरे संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं।
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इसके पीछे समय से प्रमोशन न होना, अन्य चिकित्सा संस्थानों के मुकाबले वेतन और सुविधाओं के न मिलने को वजह माना जा रहा है। आईएमएस बीएचयू के तहत मेडिसिन फैकल्टी, डेंटल फैकल्टी, आयुर्वेद फैकल्टी और ट्रॉमा सेंटर को मिलाकर 50 से अधिक विभाग हैं। इस समय 300 से अधिक चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं।
सबसे अधिक माइक्रोबायोलॉजी से चार, न्यूरो सर्जरी, हृदय रोग विभाग और पैथालॉजी से तीन-तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों ने सेवा छोड़ी है। इन लोगों ने संस्थान छोड़ने की वजह कागज में सामान्य बताई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इनका लंबे समय से प्रमोशन नहीं हो पाया था। इसके अलावा करीब पांच साल से एम्स जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहीं हैं। जरूरत के हिसाब से सीनियर रेजिडेंट भी नहीं मिल पाए हैं। यहां दो बार विज्ञापन जारी होने और साक्षात्कार के बाद भी 60 से अधिक पद खाली पड़े हैं।
बोले अधिकारी
चिकित्सक अपनी इच्छानुसार जहां बेहतर सुविधाएं देखते हैं, वहां जाते हैं। आईएमएस बीएचयू से दूसरे संस्थान में जाने वाले चिकित्सकों के साथ भी यही वजह है। इसमें वेतन सहित अन्य सुविधाओं को वजह बताया जाता है। आईएमएस में हर संभव बेहतर सुविधाएं दिलवाने का प्रयास किया जा रहा है। - प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू