Internation Day of Zero Waste: यह पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है। शहर में इस कचरे को दोबारा प्रयोग में लाने के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं। कहीं कचरे से कोयला बनाने का प्लांट लगाया गया है तो कहीं पुराने वाहनों के पार्ट्स से महात्मा गांधी की प्रतिमा बनाई गई है।
वाराणसी में रोजाना लगभग 600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। यह पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है। शहर में इस कचरे को दोबारा प्रयोग में लाने के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं।
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कहीं कचरे से कोयला बनाने का प्लांट लगाया गया है तो कहीं पुराने वाहनों के पार्ट्स से महात्मा गांधी की प्रतिमा बनाई गई है। आज दूसरे इंटरनेशनल डे ऑफ जीरो वेस्ट (अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस 2024) पर प्रस्तुत है काशी में किए जा रहे 5 इनोवेशन।
वेस्ट टू चारकोल प्लांट- शहर के रमना में कचरे से कोयला बनाने का प्लांट लगाया गया है। इस प्रकार का यह देश में पहला प्रयोग है। बीते महीने 23 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया। इस प्लांट की रोजाना क्षमता 600 टन कचरे को 200 टन कोयले में बदलने की है। इस कोयले का प्रयोग बिजली बनाने के लिए किया जाता है। 16 एकड़ में बना यह प्लांट ऐसी तकनीक से तैयार हुआ है, जिससे आसपास के लोगों को कचरे की दुर्गंध परेशान नहीं करेगी। यह प्लांट एनटीपीसी ने लगाया है जिसे नगर निगम एक निजी कंपनी के सहयोग से संचालित कर रहा है।
प्लास्टिक वेस्ट बैंक- शहर के मलदहिया में 2021 से प्लास्टिक वेस्ट बैंक संचालित किया जा रहा है। इस बैंक में लोग अपने घर की अतिरिक्त चीजें कॉपी-किताबें, खिलौने, कपड़े, जूते-चप्पल आदि लाकर जमा करते हैं। बैंक के जिम्मेदारों द्वारा उनका विवरण नोट किया जाता है। समाज के जरूरतमंद लोग यहां आकर अपने सुविधा की वस्तु लेकर जाते हैं। यह व्यवस्था पूरी तरह से निशुल्क है।
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट- शहर के 3 वेस्ट टू एनर्जी प्लांट क्रमशः आईडीएच कॉलोनी, भवनिया पोखरी और पहड़िया में हैं। नगर निगम इन प्लांट में स्थानीय मंडियों से बचने वाली सब्जियों को एकत्र करता है। इन्हें रिसाइकल करके खाद और बिजली बनाई जाती है। प्राप्त बिजली स्थानीय स्ट्रीट लाइटों को जलाने में काम आती है।
पुराने वाहनों से सुंदरीकरण- शहर के विभिन्न चौराहों जैसे- कचहरी, गोलघर चौराहा, पुलिस लाइन चौराहा, पांडेयपुर का सुंदरीकरण करने में नगर निगम के पुराने वाहनों के पार्ट्स का प्रयोग किया गया है। नगर निगम ने कूड़ा उठाने में प्रयोग होने वाली वाहनों के रिटायर होने के बाद उनके सदुपयोग के लिए यह प्रयोग किया है। इस क्रम में कचहरी चौराहे पर बनी महात्मा गांधी की प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
करसड़ा कूड़ा निस्तारण केंद्र- शहर के करसड़ा में लगभग एक दशक पहले यह प्लांट स्थापित किया गया था। यहां एकत्र शहरे के कचरे से खाद बनाकर स्थानीय किसानों को मामूली कीमत पर बेचा जाता है।