आने वाला शुक्रवार जिला प्रशासन के लिए चुनौतियों से भरा होगा। 18 सितंबर को एक तरफ प्रधानमंत्री का आगमन तो दूसरी तरफ विश्वकर्मा पूजनोत्सव की प्रतिमाओं का विसर्जन, शिक्षामित्र आंदोलन और लोलार्क कुंड स्नान। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर एक साथ चौतरफा चुनौतियों की तैयारियों में प्रशासन अब से जुट गया है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में लगे अपर नगर मजिस्ट्रेटों को दूसरे आयोजनों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीएम के कार्यक्रम और शहर की कानून व्यवस्था के मद्देनजर दूसरे जिलों से मजिस्ट्रेटों को यहां बुलाया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि व्यवस्थित तरीके से सभी तैयारियां की जा रही हैं। कहीं कोई दिक्कत नहीं आने पाएगी।
18 सितंबर को प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही तीन अन्य बड़े आयोजनों को देखते हुए प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बुधवार को कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण और डीएम राजमणि यादव ने अपने-अपने कार्यालयों में इसके मद्देनजर बैठक की। पूरी रूपरेखा तय की गई कि किस तरह सभी आयोजनों को व्यवस्थित तरीके से निबटाया जाए। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर खास तौर से एलर्ट रहने को कहा गया है। मजिस्ट्रेटों के अलावा सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में गश्त बढ़ाएं।
शिक्षामित्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन का प्रयास है कि उनके प्रतिनिधियों की पीएम से मुलाकात कराई जाए। इसके लिए छह लोगों के नाम भेजे गए हैं। प्रशासन को अनुमति मिलने की उम्मीद है। उधर, लोलार्क कुंड में स्नान के लिए उमड़ने वाली हजारों की भीड़ पर नियंत्रण के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट्रों के अलावा पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात होंगे। स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी। विश्वकर्मा पूजनोत्सव की प्रतिमाएं निर्धारित कुंडों-तालाबों में विसर्जित कराई जाएंगी।