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कछुए मिले न अंडे, बालू खनन कराने का सुझाव

Sun, 18 Oct 2015 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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कछुआ सेंचुरी में बालू खनन कराने का सुझाव गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग ने दिया है। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय के निर्देश पर गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के चेयरमैन जीएस झा के नेतृत्व में गठित आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम ने पीएमओ को भेजी अपनी रिपोर्ट में बालू खनन कराने की सलाह दी है। टीम की पड़ताल में उस पार प्रतिबंधित सेंचुरी क्षेत्र में कछुए और अंडे नहीं पाए गए हैं। कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार कछुआ सेंचुरी के नियमों में ढील देने के लिए कदम उठा सकती है।
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वर्ष 2000 में राजघाट से रामनगर किले के बीच सात किमी लंबे गंगा तट को कछुआ सेंचुरी घोषित किया गया था। तब से यहां बालू खनन पर रोक लगी हुई है। अब तक 15 वर्ष से उस पार बालू क्षेत्र का विस्तार इस तरह हुआ है कि नदी विशेषज्ञ इस पर चिंता जताने लगे हैं। हाल में ही काशी में गंगा का पारिस्थितिक अध्ययन करने वाली उच्चस्तरीय टीम ने उस पार बालू क्षेत्र में कछुआ सेंचुरी बनाने के कारणों की अभी और पड़ताल करने की जरूरत पर बल दिया है। इस अध्ययन टीम की अगुवाई करने वाले गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष जीएस झा ने बताया कि जांच के दौरान कछुआ सेंचुरी क्षेत्र में कछुए और अंडे नहीं पाए गए। बालू क्षेत्र का लगातार विस्तार हो रहा है। टीम के सदस्यों ने अध्ययन के बाद नदी की संरचना और उसके पारिस्थितिक स्वरूप को बचाए रखने के लिए बालू खनन कराने की सलाह दी गई है।
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