निकाय चुनाव में प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न दिए जाने के बाद बसपा ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। गंगापुर नगर पंचायत में अध्यक्ष और सभासद पद पर बसपा की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा न किए जाने से त्रिकोणीय मुकाबला है तो कहीं बागी खेल बिगाड़ रहे हैं।
यहां सभी दलों की निगाहें पार्टी के परंपरागत वोटरों पर हैं। गंगापुर में भाजपा को भी अपने बागी कुबेर चंद गुप्ता के विरोध से जूझना पड़ रहा है। अटकलें लगाई जा रही थीं कि नाम वापसी के दिन वे पर्चा वापस ले लेंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ।
रामनगर में नगर पालिका के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही बसपा में विरोध के स्वर फूटने लगे। नगर अध्यक्ष सहित पांच लोगों ने इस्तीफा दे दिया। अब सपा, भाजपा और कांग्रेस बसपा के इस अंतरविरोध को भुनाने में जुट गई हैं।
इधर, नगर निगम में पार्टी ने सुधा चौरसिया को महापौर का प्रत्याशी बनाया है। यहां 90 में से महज 68 वार्डों पर ही पार्षद प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे गए हैं। 22 वार्डों में बसपा का कोई प्रत्याशी नहीं है।
जिले में बसपा प्रत्याशियों के लिए जीत की जमीन तैयार करने में जुटे पार्टी के पूर्व एमएलसी शिवबोध राम ने कहा कि चुनाव संचालन के लिए शहर के उत्तरी, दक्षिणी और कैंट विधानसभा क्षेत्रों में 30-30 लोगों की कार्यकारिणी बनाई गई है।
साथ ही हर सेक्टर में कार्यकर्ता तैनात कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पान बेचने वाले की बेटी सुधा चौरसिया पर भरोसा जताया है। जनता भी उन पर भरोसा करेगी। उनका कहना है कि चुनाव में विकास कार्य तो मुद्दा होंगे ही, जीएसटी और नोटबंदी के मसले पर भी हम जनता के बीच जा रहे हैं।