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Varanasi News: 2040 तक गैर-पेयजल की एक-तिहाई जरूरत पूरी करेगा ट्रीटेड पानी, वाराणसी के लिए तैयार हुआ रियूज प्लान

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वाराणसी। वाराणसी में उपचारित (ट्रीटेड) सीवेज के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, वाराणसी नगर निगम और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की ओर से तैयार ''सिटी लेवल एक्शन प्लान फॉर रियूज ऑफ ट्रीटेड वॉटर फॉर वाराणसी'' रिपोर्ट सोमवार को नई दिल्ली में लॉन्च की गई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने ऑल इंडिया वॉटर रिसोर्स सेक्रेटरीज कॉन्फ्रेंस में इस रिपोर्ट का विमोचन किया। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2040 तक वाराणसी में गैर-पेयजल की करीब एक-तिहाई जरूरत ट्रीटेड पानी से पूरी की जा सकेगी।
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केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में वर्तमान में उपलब्ध उपचारित जल का 30 प्रतिशत तक पुन: उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 12 संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां 91 से 127 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) ट्रीटेड पानी का उपयोग संभव है। वर्ष 2040 तक यह शहर की गैर-पेयजल जरूरत का करीब 35 प्रतिशत, यानी लगभग एक-तिहाई हिस्सा पूरा कर सकता है।
वर्तमान में वाराणसी में प्रतिदिन 465 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। इसके मुकाबले 422 एमएलडी की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता उपलब्ध है, लेकिन सीवरेज नेटवर्क अधूरा होने के कारण केवल 354 एमएलडी (76 प्रतिशत) सीवेज का ही उपचार हो पा रहा है। शहर के सिर्फ 38 प्रतिशत घर केंद्रीय सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि शेष गंदा पानी 43 नालों के माध्यम से वरुणा नदी और गंगा में पहुंचता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ''वॉटर विजन-2047'' को साकार करने के लिए पानी की हर बूंद का बेहतर उपयोग जरूरी है। वाराणसी के लिए तैयार यह कार्ययोजना शहरी विकास, जल संरक्षण और गंगा जैसी पवित्र नदियों की स्वच्छता को मजबूत करने का प्रभावी मॉडल है।
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काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर के फेलो डॉ. नितिन बस्सी ने कहा कि वाराणसी में उपचारित जल के उपयोग के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा पहले से मौजूद है। अब जरूरत सीवरेज नेटवर्क के विस्तार, उपचारित जल की गुणवत्ता बढ़ाने और उसे वास्तविक मांग से जोड़ने की है। यदि उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों को टर्शियरी ट्रीटेड पानी उपलब्ध कराया जाए तो इससे संचालन एवं रखरखाव की बड़ी लागत की भरपाई हो सकती है और शहर में ट्रीटेड पानी का सशक्त बाजार विकसित होगा।
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