इरी के आइसार्क में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। तीन से पांच नवंबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में फसल अवशेषों से खाद, पशु चारा, बायोचार और ऊर्जा तैयार करने की तकनीक बताई जा रही है।
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फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन और उनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (इरी) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। तीन से पांच नवंबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में फसल अवशेषों से खाद, पशु चारा, बायोचार और ऊर्जा तैयार करने की तकनीक बताई जा रही है। साथ ही इनके प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाली कृषि मशीनों के संचालन और रखरखाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। तीन नवंबर को कार्यक्रम का उद्घाटन वाराणसी के उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने किया।
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उन्होंने कहा कि सरकार फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी मशीनों पर सब्सिडी दे रही है। ऐसे प्रशिक्षण किसानों को मशीनों के सही संचालन, मरम्मत और रखरखाव की जानकारी देने में मददगार हैं। आइसार्क के अंतरिम निदेशक डॉ. विकास कुमार सिंह ने कहा कि फसल अवशेषों को बेकार समझने के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में देखना चाहिए। तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाना और उनके लिए आर्थिक रूप से लाभकारी समाधान तैयार करना जरूरी है।
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प्रशिक्षण में इरी, अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र (सिमीट) और आईसीएआर-केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के विशेषज्ञ जानकारी दे रहे हैं। इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के कृषि विज्ञान केंद्रों सहित विभिन्न कृषि संस्थानों, विश्वविद्यालयों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। बांग्लादेश के कृषि विस्तार विभाग के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान खेत में ही फसल अवशेषों के प्रबंधन और खेत से बाहर उनके उपयोग के तरीके बताए जा रहे हैं। इस मौके पर स्मार्ट सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन और बेलर का प्रदर्शन हुआ। प्रतिभागियों को इनके संचालन की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा फसल अवशेषों से मशरूम उत्पादन, पशु चारा, कम्पोस्ट, बायोचार और बायोमास ऊर्जा तैयार करने के तरीके बताए जा रहे हैं।