वाराणसी। गलियों के शहर काशी में यातायात सुगमता के लिए प्रदेश सरकार के बजट में निर्णय लिया जा सकता है। प्रदेश सरकार कम खर्च और खंभों के सहारे परिचालन वाली मोनो रेल के विकल्प पर भी विचार कर रही है। ऐसे में लाइट मेट्रो की जगह शहर की दो रूटों पर मोनो रेल के संचालन पर निर्णय लिया जा सकता है। बजट में इसकी घोषणा के साथ इसके लिए बजट भी आवंटित किया जा सकता है।
दरअसल, रेल मंत्रालय की संस्था राइट्स ने दो साल पहले मेट्रो, लाइट मेट्रो के साथ ही मोनो रेल की संभावनाओं पर सर्वे किया था। पहले कराए गए सर्वे में बीएचयू से लेकर भेल तक और बेनियाबाग से लेकर सारनाथ तक दो रूट तय किए गए हैं। इन दोनों रूटों पर करीब 29 किमी लंबी लाइन के लिए मोनो रेल की संभावनाएं तलाशी गई थी। वीडीए ने दोबारा सर्वे के लिए रेल मंत्रालय की तकनीकी संस्था राइट्स को 81 लाख रुपये दिए थे। मोनो रेल दो तीन डिब्बों की होती है और यह खंभों के सहारे आसानी से शहर में दौड़ाई जा सकती है। जबकि मेट्रो परियोजना में 17 हजार करोड़ और लाइट मेट्रो में 14 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। जबकि मोनो रेल में नौ हजार करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि राइट्स ने मोनो रेल की संभावनाओं पर सर्वे किया था। रिपोर्ट शासन को सौंपी गई थी। शासन के निर्णय के अनुसार काम शुरू कराया जाएगा।