दुनिया में काशी की पहचान गंगा घाटों से है और घाटों को कलात्मक छतरियों से जाना जाता है। गंगा घाटों पर छतरियों के नीचे बैठकर चंदन घिसते और तिलक लगाते पंडे और पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु एक अलग तरह की छटा का अहसास दिलाते हैं।
कभी दशाश्वमेध घाट और केदार घाट से तुलसी घाट तक गंगा-जमुनी तहजीब को बयां करने वाली छतरियां शोभायमान होती थीं लेकिन अब कुछ ही घाटों पर ये नजर आती हैं।
घाटों को चार चांद लगाने वाली बांस की इन छतरियों को अपने कैमरे में कैद करने के लिए सात समंदर पार से विदेशी आते हैं। जल्दी ही ये छतरियां बीते दिन की बात हो जाएंगी।
वजह, छतरियों को बनाने वाले अब मात्र तीन ही कारीगर बचे हैं। सभी एक ही परिवार के हैं और बुजुर्ग हो चले हैं। इनकी अगली पीढ़ी छतरियां बनाने का हुनर सीखने को तैयार नहीं है।