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आज रात सतरंगी नजारों से पटेगा आसमान, 'अनारकली ऑफ आरा' का दिखेगा जलवा

Thu, 19 Oct 2017 04:22 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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पटाखा बाजार में उतरी रौनक, 50 करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद - फोटो : अमर उजाला
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दीपावली की रात सतरंगी नजारों के बीच दीयों-झालरों की जगमग और बम-पटाखों के धूम-धड़ाके से रोशन होगी। चटाई, बीड़ी बम, फुलझड़ियां और अनार फूटेंगे और सतरंगी नजारों से पट जाएगा आसमान। बनारस के पटाखा बाजार में छोटा भीम, ओगी, स्पाइडर मैन, बिल्लो बम, अनारकली ऑफ आरा और शिवाकाशी की फुलझड़ी का जलवा है।
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इनकी मांग सबसे अधिक है। हालांकि जीएसटी और सख्ती के कारण पटाखा व्यवसाय में गिरावट देखने को मिल रही है। पूर्वांचल में पिछले साल पटाखा कारोबार लगभग सवा सौ करोड़ रुपये का था वहीं इस बार इसके 50 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान है। छोटी दिवाली पर खरीदारी में आई तेजी से कारोबारी उत्साहित नजर आए। 

बेनियाबाग, मच्छोदरी पार्क, डीरेका मैदान, नाटी इमली समेत शहर के 18 जगहों पर पटाखे की बिक्री दूसरे दिन तेज रही। छोटी दीपावली के दिन बाजार में सुबह से ही ग्राहकों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था।
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इन दूकानों पर बम, एटम-बम, 17 और सात अवाजा समेत छोटी-बड़ी लड़ियों वाले पटाखों के साथ ही बीड़ी बम, फुलझड़ी, राकेट, अनार समेत लाइटिंग वाले पटाखे सजे हुए थे। बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाले पटाखे भी दुकानों पर खूब बिके। पटाखा बाजार में जीएसटी को काला सांप बताकर पेश किया गया है तो नोटबंदी को फुसफुस अनार के तौर पर बेचा जा रहा है। 
 
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दिवाली पर चाइनीज पटाखे ‘फुस्स’

- फोटो : demo

पटाखा कारोबारी बाबा खान ने बताया कि पटाखा बाजार में इस बार वैरायटी तो बहुत है लेकिन जीसएटी और नियमों में सख्ती के कारण पूर्वांचल में इस बार बिक्री का आंकड़ा आधा रह गया है। सादा और रंगीन फुलझड़ी 10 से लेकर तीन सौ रुपये, चरखी 10 से 50, बम 20 से 32 हजार, राकेट सौ से लेकर 15 सौ, अनार तीन सौ से 1750 रुपये डिब्बा और बंदूक 20 से लेकर 120 रुपये में उपलब्ध है। बिल्लो बम पांच सौ रुपये, पैराशूट बम सात सौ रुपये, मैजिक बम सात रुपये, बुलेट बम 80 रुपये, महावीर फुलझड़ी 70, तीन टाप आवाज 520 रुपये में उपलब्ध है।

स्वेदशी के प्रति प्रेम कहें या लोगों में जागरूकता का असर इस दीपावली पटाखा बाजार पर भी नजर आ रहा है। बाजार में चाइनीज पटाखे फुस्स हो गए हैं। शहर में लगाए गए अस्थायी पटाखा बाजार की दुकानों पर चाइनीज पटाखे ढूंढने से नहीं मिल रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि पिछले वर्ष के इक्का-दुक्का बचे पटाखे अगर बचे हो तो ही चाइनीज पटाखे मिलेंगे, अन्यथा नया माल किसी ने नहीं मंगाया है। स्वदेशी पटाखे ही ज्यादा बेचे जा रहे हैं, जो लोगों को पसंद भी आ रहे हैं। 
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