काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. राम नारायण द्विवेदी ने प्रसाद में चर्बी मिलने पर गहरा दुख व्यक्त किया। विद्वत परिषद शीघ्र ही बैठक कर इस पर उचित निर्णय लेगी क्योंकि इस तथ्य से तिरुपति जाने वाले लगभग 30 करोड़ हिंदू भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। हमारी केंद्र सरकार व आंध्र प्रदेश सरकार से मांग है कि इस तथ्य की गंभीरता से और जांच होनी चाहिए।
मठ-मंदिर चलाना सरकारों का काम नहीं
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यह गंभीर किस्म का धार्मिक अपराध है। मंदिर के प्रसाद में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल निंदनीय है। मठ मंदिर चलाना सरकारों का काम नहीं है। हमारे मंदिर हमारी श्रद्धा के केंद्र हैं, वह समाज के द्वारा ही संचालित होने चाहिए। मंदिरों में गैर हिंदुओं का प्रवेश और उनके द्वारा मंदिरों का संचालन कतई नहीं होना चाहिए।
आस्था से खिलवाड़ करने वालों पर हो कठोर कार्रवाई
सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा कि सनातन के नाश के लिए जो कूटनीतियां रची जा रही हैं इस पर हमें चेतना होगा। किसी को प्रसाद में अभक्ष्य खिलाना न्याय के विरुद्ध है। मैं उच्चतम न्यायालय से निवेदन करना चाहता हूं कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई करें और उनको जेल भेजें। मंदिर की व्यवस्था को सनातन को जानने और मानने वालों को सौंपा जाए।
भगवान तिरुपति के प्रसाद में मिलावट हिंदू समाज के प्रति अपराध
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि तिरुमाला लड्डू घटिया सामग्री से बनाए गए थे। यह हिंदुओं का धर्मभ्रष्ट करने की बड़ी चाल लगती है। हमारे संविधान और कानून के अनुसार दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। हम सनातनी हिंदुओं की ओर से सरकार और न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वे इसे अभियोग के रूप में पंजीकृत कर फास्ट ट्रैक सुनवाई करते हुए दोषियों को शीघ्र दंडित करें। शंकराचार्य पीठ मांग करती है कि हिंदू समाज को बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप या नियंत्रण के अपने सभी मंदिरों की सुरक्षा, प्रशासन और संचालन की शक्ति वापस दी जाए। चारों शंकराचार्य परस्पर परामर्श कर धर्मरक्षा के लिए व्यापक अभियान की रूपरेखा तैयार करेंगे। शृंगेरी और द्वारका शंकराचार्यों के साथ अपने विधि विशेषज्ञों से परामर्श ले रहे हैं। इसके बाद न्यायालय का रुख करेंगे।